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Personal Finance Personal Finance सोमवार
जीवन से अपेक्षाएं बढ़ने और साथ ही खर्चे बढ़ने के कारण रिटायरमेंट की प्लानिंग समय की जरूरत बन चुकी है। सबसे महत्वपूर्ण है रिटायरमेंट योजना पर तुरंत अमल करना।
अमल के बाद निवेशक को चाहिए कि वह उन निवेश विकल्पों की तलाश शुरू कर दे जिनमें वह अपनी रिटायरमेंट की पूंजी निवेश करना चाहता है। यहां सवाल उठता है कि निवेश के लिए कौन से विकल्प बेहतर हैं। इनवेस्टमेंट व्हीकल्स को तीन वर्र्गो में बांटा गया है यानी निवेशक तीन सेग्मेंट के तहत निवेश कर सकता है।
शॉर्ट-टर्म इनवेस्टमेंट
निवेशक का यह लक्ष्य होना चाहिए कि वह 3-6 महीने की लिक्विडिटी बना कर रखे। लिक्विडिटी चाहे सेविंग बैंक अकाउंट में हो या फिर मनी मार्केट फंड में। एक बार निवेशक द्वारा सेविंग अकाउंट में कुछ मनी मेंटेन कर लेने के बाद वह शेष राशि को लिक्विड फंड में लगा सकता है। उसे जितने समय के लिए लिक्विडिटी चाहिए उसी आधार पर वह शॉर्ट टर्म इंकम फंड्स, बैंक फिक्स डिपॉजिट्स और फिक्स मैच्योरिटी प्लांस जैसे शॉर्ट टर्म लिक्विड फंड में निवेश कर सकता है।
फिक्स इनकम इंस्ट्रूमेंट्स
कई निवेशक पहले से ही एम्पलॉई प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ) का हिस्सा होते हैं या फिर उनके पास नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट होते हैं। इनसे निवेशक को दोगुना लाभ होता है। एक तो वह रिटायरमेंट के लिए बचत कर पाता है दूसरा सेक्शन 80 सी के तहत टैक्स बेनिफिट्स भी प्राप्त कर सकता है। किसान विकास पत्र, पोस्ट ऑफिस स्कीम्स और नाबार्ड बॉण्ड्स कुछ ऐसे ही विकल्प हैं।
इक्विटीज
आजकल इक्विटीज (शेयरों) में निवेश के प्रति काफी भेड़चाल है। पिछले पांच वर्र्षो से जिन निवेशकों ने इक्विटीज में निवेश किया है उनको पोर्टफोलियो में अच्छी ग्रोथ हासिल हुई। सतर्कता और जोखिम दोनों ही इविक्टीज के साथ-साथ चलते हैं इसलिए जिन निवेशकों में जोखिम उठाने की क्षमता कम हो या वे शॉर्ट टर्म इनवेस्टर्स हों उन्हें इक्विटीज में निवेश नहीं करना चाहिए। इक्विटीज में निवेश कम से कम पांच वर्षो की अवधि तक के लिए किया जाना चाहिए।
इस तरह का निवेश सेकंडरी मार्केट्स या प्राइमरी मार्केट्स के जरिए किया जा सकता है। ऐसा ही एक और विकल्प है म्युचूअल फंड्स। इन फंड्स में निवेश करने से पहले निवेशक को निवेश उद्देश्यों और रिस्क-रिटर्न्स पैरामीटर्स को अच्छी तरह समझ कर ही निवेश करना चाहिए।