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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. जीवाजी विश्वविद्यालय की राजनीति अध्ययन शाला के मध्य एशिया अध्ययन केन्द्र द्वारा भारत एवं मध्य एशिया, वर्तमान परिदृश्य में ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का नवीन आधारों पर पुनर्नवीनीकरण विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ रविवार को हुआ। इस सेमीनार में देश-विदेश के अनेक प्रतिभागी शामिल हुए हैं। उद्घाटन समारोह में प्रमुख उद्बोधन प्रोफेसर विलियम फ्रिअरमैन ने दिया।
श्री फ्रिअरमैन ने एशिया में लंबे समय तक कार्य करने के अपने अनुभवों को बताया। उन्होंने उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान आदि में 1980 से आज तक हुए परिवर्तनों एवं विकास का विवेचन प्रस्तुत किया। साथ ही मध्य एशिया के सभी राष्ट्रों की सांस्कृतिक एवं भाषायी विविधताओं और एकरूपता पर विस्तार से प्रकाश डाला।मुख्य अतिथि प्राणिकी अध्ययनशाला के आचार्य डा. डीएन सक्सेना ने मध्य एशिया एवं भारत के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए इनके वर्तमान परिदृश्य में आगे बढ़ाने पर बल दिया।
उन्होंने भविष्य में इन क्षेत्रों पर विद्यार्थियों को शोध के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमीनार के निदेशक प्रो. एपीएस चौहान ने राजनीति अध्ययनशाला के मध्य एशिया अध्ययन केन्द्र द्वारा मध्य एशिया एवं भारत के बीच विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे अध्ययन एवं शोध कार्य का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र का समापन जीवाजी विश्वविद्यालय के वाणिज्य एवं प्रबंध संकाय के उपाचार्य एवं आयोजन के सह संयोजक डा. योगेश उपाध्याय के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।