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जांच में दोगुना निकला ध्वनि प्रदूषण

ग्वालियर. घनी आबादी के बीच संचालित मैरिज हाउस न केवल ध्वनि व वायु प्रदूषण फैला रहे हैं बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित कर रहे हैं। शादी समारोह खत्म होने के बाद ऐसे स्थलों पर बड़ी मात्रा में कचरा भी एकत्रित हो जाता है जो आम जनता को परेशान करता है।

कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव की ओर से एडीएम वेदप्रकाश ने शहरी क्षेत्र के 30 शादी स्थलों को सूचीबद्ध कर उनकी जांच का संयुक्त अभियान चलाया। इस अभियान की जो रिपोर्ट आई है, वह न तो आमजनता के हित में मानी जा सकती है, न सरकारी मापदण्डों के अनुसार। स्थिति यह है कि जांच के दायरे में लिए गए अधिकांश शादी समारोह स्थलों के पास जांच वाले दिन अस्त-व्यस्त पार्किग तो मिली, साथ में ध्वनि प्रदूषण 75 से 90 डेसीबल के आसपास मिला है। वायु प्रदूषण को लेकर भी यही स्थिति सामने आई है।

प्रदूषण विभाग के नियमों के अनुसार आवासीय क्षेत्र में दिन के समय 55 डेसीबल तथा रात के समय 45 डेसीबल ध्वनि होना चाहिए। इसी तरह शांत क्षेत्र में दिन के समय 50 डेसीबल व रात के समय 40 से अधिक डेसीबल ध्वनि नहीं होना चाहिए। संयुक्त जांच दल ने सभी शादी समारोह की जांच रात के समय ही की थी। नोटिस, 22 को जवाब मांगा

एडीएम न्यायालय ने शहर के 30 मैरिज हाउस संचालकों को धारा-133 के तहत नोटिस दिया है। इसमें कहा गया है कि ध्वनि, वायु प्रदूषण व यातायात में अवरोध पैदा करना गंभीर प्रकृति का पब्लिक न्यूसेंस है। इसका निरंतर बना रहना लोकहित में अत्यंत ही खतरनाक है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि या तो वे ऐसे सभी तरह के आयोजन को रोक दें जिससे गंभीर प्रकृति का न्यूसेंस होता है या 22 मार्च को स्वयं (संचालक) उपस्थित होकर कारण बताएं कि क्यों न इस आदेश को प्रवर्तित (एनफोर्स) कर दिया जाए।





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