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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. राशन दुकानों को लेकर पिछले दरवाजे से आए तीन दर्जन आवेदकों को दुकानें आवंटित करने से आयुक्त खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण ने साफ इनकार कर दिया है। आयुक्त के इस आदेश के बाद एक बार फिर भाजपा व कांग्रेस नेताओं में मायूसी छा गई है।
राशन दुकानों के आवंटन को लेकर आयुक्त द्वारा कलेक्टर को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि जिले में स्वायत्त सहकारिता अधिनियम 1999 के तहत पंजीकृत समितियां जो मध्य प्रदेश सहकारिता अधिनियम 1960 की धारा- 9 (क) के अंतर्गत संपरिवर्तित की गई हैं, को उचित मूल्य की दुकान संचालन की पात्रता नहीं है। उल्लेखनीय है कि सहकारिता विभाग ने लगभग 33 समितियों के पंजीयन गलत तरीके से बदल दिए थे।
यह बात सामने आने पर एडीएम वेदप्रकाश ने सहकारिता विभाग से कुछ फाइलें अपने कब्जे में लेकर जांच की और रिपोर्ट आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयन को भेजी। इसमें कहा गया कि अधिनियम 1999 के तहत पंजीकृत समितियों का धारा 1960 के तहत परिवर्तन नियमानुसार नहीं है।
क्या है दुकानों का मामला
खाद्य विभाग ने एक समिति पर एक से अधिक राशन दुकानें होने, एक दुकान पर एक हजार से अधिक राशन कार्ड होने की स्थिति में उन समितियों से 1 जनवरी 2008 तक आवेदन मांगे थे जिनके पास दुकानें ही नहीं हैं। उक्त दो बिन्दुओं पर जब छानबीन की गई तो 98 दुकानों के लिए लगभग दो सौ आवेदन मिले, पर पात्र केवल 66 निकले। चूंकि दुकानें अधिक थीं और पात्र आवेदक कम, इसलिए अधिनियम 1999 के तहत पंजीकृत लगभग 33 संस्थाओं ने भी 1960 के तहत समितियों को पंजीकृत करा लिया और आवेदन कर दिए थे।
कहां-कहां गई फाइल
राशन दुकानों के आवंटन में भाजपा व कांग्रेस खास रुचि ले रही हैं। खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले तीन माह से दुकान आवंटन संबंधी फाइल नेताओं के बीच फुटबॉल बनी हुई है। यह फाइल रेलवे स्टेशन क्षेत्र में बने दो बंगलों पर भाजपा नेताओं की डिमाण्ड पर भेजी गई। दोनों स्थानों पर प्रदेश स्तर के नेताओं ने न केवल फाइल का अवलोकन किया बल्कि अपनी-अपनी पसंद के आवेदकों की सिफारिश भी की। ठीक ऐसी ही स्थिति कांग्रेस नेताओं की रही। फाइल इनके निवास पर तो नहीं गई पर एक पूर्व विधायक के नेतृत्व में कुछ लोग खाद्य विभाग ही पहुंच गए।