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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior मुरैना.
पांच माह पहले तिगरा का पुरा निवासी रेवती के घर में अंधेरा रहता था, क्योंकि बिजली आती नहीं थी और केरोसिन (स्थानीय भाषा में लंप) मिलता नहीं था। बेशक उसके पास बीपीएल सूची का राशन कार्ड है। अब उसका घर ‘लंप’ की लौ से दमकता है। पहले सहकारी संस्था से पीडीएस के तहत मिलने वाला उसके हिस्से का लंप का तेल व खाद्यान्न ब्लैक में बिक जाता था।
जिससे उसके हाथ में केवल राशन कार्ड ही रह जाता था। अब उसे तेल व खाद्यान्न महीने की निर्धारित तिथि को मिल जाता है। यह सब हुआ है प्रशासन की केन्द्रीयकृत वितरण योजना से जो कि प्रदेश ही नहीं देश में भी अनूठी है। इससे पीडीएस का 90 फीसदी लीकेज रुका है। पीडीएस को लेकर केन्द्र सरकार ने एक सर्वे कराया था। जिसमें नार्थ-ईस्ट में सौ प्रतिशत, उत्तरप्रदेश में 80 प्रतिशत व मध्यप्रदेश में 60 प्रतिशत लीकेज पाया गया था।
सफल प्रयोग: जिला प्रशासन ने पीडीएस के तहत मिलने वाले केरोसिन व अनाज की कालाबाजारी रोकने के लिए एक साल पहले शहरी क्षेत्र में 11 से 13 तारीख तक निश्चित स्थान पर केरोसिन बांटने की योजना बनाई। साथ ही विभिन्न शासकीय अमलों के अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर मिट्टी का तेल बांटने की जिम्मेदारी सौंपी। इस व्यवस्था से शहरी क्षेत्रों में 90 फीसदी लीकेज रुक गया और राशनकार्ड धारकों को केरोसिन मिलने लगा। फिर आई ग्रामीण क्षेत्र की बारी, प्रशासन ने यहां भी यही प्रयोग किया, जो सफल रहा। इससे ग्रामीणों को भी सही समय पर केरोसिन व अनाज मिलने लगा।
योजना का स्वरूप: जिला प्रशासन ने गांवों में केरोसिन व खाद्यान्न वितरण के लिए पूरे जिले में 21 से 24 तारीख फिक्स की हैं। जिन सहकारी संस्थाओं पर ढाई हजार से कम राशन कार्ड हैं वहां तीन दिन, जहां इससे अधिक हैं वहां चार दिन केरोसिन व खाद्यान्न बांटा जा रहा है। साथ ही पंचायत में आने वाले गांवोंके लिए भी इन तीन दिनों में एक दिन निश्चित किया गया है। अब ग्रामीण केरोसिन व अनाज के लिए संस्थाओं के चक्कर नहीं लगाते। एक निश्चित तारीख को आकर बिना परेशानी के केरोसिन ले जाते हैं। दूसरे विभागों के नोडल अधिकारी: राशन वितरण के निश्चित दिवसों पर हर सहकारी संस्था पर दूसरे शासकीय अमलों के अफसरों को बतौर नोडल अधिकारी अधिकारी तैनात किया गया है। जो न केवल केरोसिन व खाद्यान्न बांटते हैं, बल्कि संस्था के स्टाक को संधारित करते हैं। इन नोडल अधिकारियों का कार्यकाल चार महीने रखा गया है, इसके बाद इन्हें बदल दिया जाता है, ताकि नोडल अधिकारी संस्था के संचालकों के साथ सांठगांठ न कर सकें।
त्रिस्तरीय मॉनीटरिंग व्यवस्था: केरोसिन वितरण केंद्रों पर नोडल अधिकारी तो पूरी व्यवस्था पर नजर रखते ही हैं, साथ ही उनके ऊपर भी नजर रखने के लिए जोनल अधिकारी तैनात किए गए हैं। केरोसिन वितरण के निश्चित दिवसों में अचानक सहकारी संस्थाओं पर पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लेते हैं। इसके अलावा कलेक्टर, एडीएम व एसडीएम भी इन वितरण केन्द्रों का निरीक्षण करते हैं। त्रिस्तरीय मॉनीटरिंग व्यवस्था के चलते पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत जिले में 90 फीसदी कालाबाजारी पर रोक लगी है। जिले में पीडीएस के लिए बनाई गई इस नवीन व्यवस्था को आमजन ने तो सराहा ही है, साथ ही शासन स्तर से भी सराहना मिल चुकी है।