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महंगी हुई तेल की धार

बिलासपुर. विदेशों से तेल की आवक कम होने और वायदा बाजार में मंदी छाने के कारण खाद्य तेलों के भाव में 30 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। थोक व्यवसायी होली से पहले दाम में और वृद्घि की बात कह रहे हैं।

महंगाई की मार का असर खाद्य तेलों पर भी पड़ा है। आम बजट में भी जनता को राहत नहीं मिल सकी। पिछले साल के मुकाबले इस साल तेल के भाव में 30 से 35 फीसदी वृद्घि की बात थोक व्यवसायी बता रहे हैं। खाद्य तेल का कारोबार वायदा बाजार पर निर्भर होने के कारण रोज ही दाम में घट-बढ़ हो रही है। जानकारों का कहना है कि भारत में मांग के मुताबिक तिलहन का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।

इसके चलते विदेशों से तेल की आपूर्ति की जाती है। इस साल विदेशों में अच्छी फसल नहीं होने के कारण आपूर्ति में कमी आई है, जिसके चलते खाद्य तेलों के दाम भी बढ़ रहे हैं। भारत के मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात में तिलहन फसलें होती हैं। राइसब्रान का उत्पादन छत्तीसगढ़ में ही होता है। इस साल तिलहन की ड्योढ़ी फसल होने के बावजूद मांग से करीब 25 फीसदी उत्पादन कम हुआ है।

इसकी पूर्ति विदेशों से आयात कर की जाती है। सालभर पहले 1025 मिलने वाले सोयाबीन तेल का तेल इस बार 1060 और 1090 तक पहुंच गया है। 950 रुपए का राइसब्रान 955-960 रुपए बिक रहा है। फाचरुन व सनफ्लावर के दाम में भी तेजी आई है। थोक व्यापारियों का कहना है कि होली के करीब आने पर खाद्य तेलों के भाव में तेजी आएगी। व्यापार विहार के थोक तेल व्यवसायी नंदलाल गुप्ता का कहना है कि तेलों के भाव में अस्थिरता बनी हुई है।

वायदा बाजार के मुताबिक प्रतिदिन घट-बढ़ हो रही है। सोमवार-मंगलवार तक तेल के भाव में कमी आ सकती है। इकानामिक्स के प्रोफेसर केके शर्मा का कहना है कि भविष्य में तेल के दाम में वृद्घि के आसार देखकर थोक व्यापारी तेल का स्टाक कर लेते हैं। बाद में किसी कारण से भाव नहीं बढ़ते हैं तो व्यापारी स्टाक ओपन नहीं करते और मांग बढ़ जाती है। इसके बाद अधिक कीमत पर उसे बेचा जाता है। इस तरह बाजार में अनिश्चितता की स्थिति रहती है और कारोबारी इसका लाभ उठाते हैं।





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