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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. मिशन सिकलसेल राजधानी से 18 किमी दूर धरसींवा से शुरू किया गया। गांव-गांव में सिकलिंग के मरीजों की तलाश मेंअब तक 30 हजार ब्लड सैंपल (खून के नमूने) इकट्ठा कर लिए गए। इस दौरान सिकलिंग के 3 हजार नए मरीजों का पता चला है।
पं. जवाहरलाल नेहरु मेर्डिकल कालेज में माइक्रोबायोलाजी विभाग का कैरियर डिटेक्शन सेल इस रिसर्च में लगा है कि सिकलिंग के जितने केस सामने आए, उनमें कैरियर (बीमारी के वाहक) कितने हैं। इनकी पहचान के बाद पीड़ितों की ‘मेडिकल कुंडली’ तैयार की जाएगी। मेडिकल कुंडली की एक प्रति पीड़ितों के घर भेजी जाएगी। मेडिकल हिस्ट्री के साथ पीड़ितों के परिजनों को सलाह भी दी जाएगी कि उन्हें भविष्य में क्या करना है। माइक्रोबायोलाजी विभाग के एचओडी और डिटेक्शन सेल के इंचार्ज डा. प्रदीप कुमार पात्रा ने बताया कि मार्च महीने के अंत तक धरसींवा विकासखंड का सर्वे कर लिया जाएगा।
एक ब्लाक कंप्लीट होने के बाद पूरे कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी। मौजूदा अभियान में सुधार की जरुरत होने पर संशोधन के बाद दूसरे ब्लाक में सिकलिंग पीड़ितों की तलाश शुरु की जाएगी। मेडिकल कालेज सूत्रों ने बताया कि आंबेडकर अस्पताल में डा. स्मिथ श्रीवास्तव, डा. सुमीत त्रिपाठी और डा. पीके खुदियार सिकलिंग सेल संभालते हैं। राज्य शासन ने पहले चरण में इस प्रोजेक्ट के लिए 70 लाख रुपए दिए हैं।
कैसे चल रहा मिशन
कैरियर डिटेक्शन सेल ने 7 टीमें फील्ड में उतारी हैं। सेल के काउंसलर पूरा कार्यक्रम तय करते हैं। जिस स्कूल, गांव या बस्ती में ब्लड सेंपल कलेक्ट करना है, वहां एक दिन पहले काउंसलर पहुंचकर लोगों को अभियान की जानकारी देते हैं। दूसरे दिन सुपरवायजर के नेतृत्व में टीम पहुंचकर सीधे ब्लड कलेक्ट करती हैं। खून का सालिबुलिटी टेस्ट आन द स्पाट किया जाता है। इस टेस्ट के जरिये वहीं यह पता चल जाता है कि कौन सिकलिंग से पीड़ित है।
कैरियर और डिसीज
अब तक की रिसर्च से पता चला है कि सिकलिंग दो तरह का होता है, कैरियर और डिसीज। विशेषज्ञों का कहना है कि जिसके खून में कैरियर सिकलिंग है वह आम लोगों की तरह है। इसमें इलाज की जरुरत नहीं है। ऐसे लोगों को शादी के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जिस लड़की या लड़के से उनका विवाह हो रहा है वे खुद कैरियर न हो। ऐसी शादी में 25 प्रतिशत बच्चों के कैरियर होने का चांस रहता है।
निशाने पर बच्चे और युवा
3 से 15 वर्ष के किशोरों में ही सिकलिंग की जांच करने का लक्ष्य तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा पीढ़ी में कैरियर और डिसीज का पता लगाकर सिकलिंग को कंट्रोल किया जा सकता है। प्रदेश की जनसंख्या के आधार पर ऐसा अनुमान है कि यहां 1 करोड़ की आबादी 3 से 15 वर्ष के लोगों की है। उसी आधार पर पूरे लक्ष्य को तय करने का एक्शन प्लान भी तैयार किया जा रहा है।