जयपुर. जनजाति आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जर सोमवार को जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में जुटेंगे। संयुक्त गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले गुर्जर समाज अपना राजनीतिक फैसला भी कर सकता है। इस बीच महापड़ाव को टालने और गुर्जरों को राजी करने के लिए सरकार ने गुर्जर नेताओं को सभी मुकदमे वापस लेने का भरोसा दिलाया है। इधर, महापड़ाव की आशंका के चलते राज्य में गिरफ्तारियों का सिलसिला रविवार को थम गया।
महापड़ाव करने को लेकर रविवार शाम तक भी संशय बना रहा। इस बारे में संघर्ष समिति के संयोजक प्रहलाद गुंजल और सदस्य विधायक अतरसिंह भड़ाना ने बताया कि महापड़ाव के बारे में फैसला समाज ही करेगा। उन्हें वसुंधरा सरकार से गुर्जरों की चिट्ठी भेजने की उम्मीद नहीं है। गुर्जरों के सभी मुकदमे वापस लेने की गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने पहल शुरू कर दी है। गुर्जर अपना राजनीतिक फैसला करके ही जाएगा।
नहीं हो पा रही है गुर्जरों में एकता : गुंजल ने बताया कि विद्याधर नगर स्टेडियम में होने वाली महापंचायत में आरक्षण आंदोलन में सहयोग करने वाले कौम के सभी प्रमुख नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इनमें कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला भी शामिल हैं। महापंचायत को राष्ट्रीय गुर्जर एकता मंच के अध्यक्ष राजेन्द्रसिंह विधूड़ी, संयुक्त गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य विधायक अतरसिंह भड़ाना और वे खुद संबोधित करेंगे।
निर्णायक मंडल के निर्णय के बारे में पूछे जाने पर गुंजल ने कहा कि राजनीतिक फैसला समाज करेगा, निर्णायक मंडल नहीं। अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के प्रदेशाध्यक्ष गोपीचंद गुर्जर और कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला इस महापंचायत को पहले ही राजनीतिक सौदेबाजी की संज्ञा दे चुके हैं।
यूएनपीए के समर्थन का स्वागत: संयुक्त गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने उनकी मांग का समर्थन करने के लिए यूएनपीए का स्वागत किया है। समिति के संयोजक गुंजल ने कहा कि यूएनपीए में शामिल पांच पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती तथा रक्षा मंत्री स्तर के नेता उनकी मांग का समर्थन कर रहे हैं। इससे साफ जाहिर है कि गुर्जरों की मांग जायज है।
इसके विपरीत राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने अड़ियल रुख पर कायम हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत उनकी मांग को असंवैधानिक बताकर घावों को कुरेदने की कोशिश कर रहे हैं। गुंजल ने कहा कि जो भी राजनीतिक महापंचायत पर आकर उनसे आरक्षण की चिट्ठी भिजवाने का वादा करेगा, गुर्जर समाज उसी दल के साथ जाएगा।
ये राजनीतिक सौदेबाजी कर रहे हैं : बैसला
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने कहा है कि खेड़ली की बैठक में आरक्षण का मुद्दा आगे बढ़ाने के लिए एकता हुई थी। उसी में निर्णायक मंडल का गठन हुआ था। गुंजल-भड़ाना ने न केवल निर्णायक मंडल को अंधेरे में रखकर सरकार से बात की, बल्कि इस महापंचायत के नाम पर राजनीतिक फैसला करना चाहते हैं, जबकि यह अधिकार केवल निर्णायक मंडल के पास है।