जयपुर. मुरलीपुरा में दूषित पानी की सप्लाई के बाद वाटर प्यूरीफायर बेचने वालों ने धंधा जमाना शुरू कर दिया है। वीकेआई रोड नंबर-6 पर स्वच्छ पानी को दूषित बताकर आरओ प्लांट बेचने वाले एक व्यक्ति को रविवार को स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया। सूचना पर मौके पर पहुंचे जलदाय विभाग के अफसरों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
मुरलीपुरा थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। कई वर्र्षो तक निजी कंपनियों में आरओ प्लांट बेचने वाले वीकेआई निवासी चंद्रप्रकाश शर्मा (३४) को प्यूरीफायर प्लांट बेचना मुनाफे का सौदा लगा। शनिवार को ही उसने इलाके में घूम कर इसे बेचना शुरू किया था। मगर दूसरे ही दिन धरा गया।
ऐसे देता था झांसा
चंद्रप्रकाश ने बताया कि वह घरों में जाकर उनसे पानी चेक कराने की गुजारिश करता था। चेक करने के दौरान वह गिलास में पानी लेकर उसमें जंग खाई रॉड लगी हुई मशीन को लगाकर उसे चालू कर देता था। बिजली प्रवाहित होते ही रॉड का जंग उतरने लगता था। इसके बाद वह इलेक्ट्रोलाइजर मशीन से पानी में टीडीएस चेक करता।
लोगों को पहले ही बता देता था कि अगर टीडीएस १क्क् से ज्यादा हुआ तो पानी खराब होगा। जंग लगे पानी का टीडीएस २क्क् से भी ज्यादा होता था। रविवार को एक परिवार को उसने पानी में टीडीएस की मात्रा २३६ बताई और कहा कि ऐसा पानी पीने पर मौत तय है। इस पर परिवार के मुखिया ने जलदाय विभाग को फोन किया। मौके पर पहुंचे अजय सिंह ने उससे पूछताछ की और थाने ले आए। जहां उसने लोगों से धोखाधड़ी करना कबूल कर लिया।
जलदाय विभाग के एसई आरपी माथुर ने बताया कि उसके खिलाफ विभाग ने भ्रामक प्रचार करने और लोगों को ठगने के संबंध में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया गया है। आरोपी ने स्वीकार किया है कि वह दूषित पानी आने की खबरों के बाद इससे फायदा कमाने की सोचने लग गया था। इसलिए उसने निजी कंपनी की आठ साल की नौकरी छोड़ दी।
कुछ कंपनियों के कैटलॉग और दो मशीनें लेकर वह आरओ प्लांट बेचने आ गया। पानी को मशीन से दूषित करने और फिर उसका टीडीएस जांचने की विधि उसने प्यूरीफायर कंपनियों में सेल्समैन की नौकरी करते हुए सीखी थी।