जयपुर.
जीर्णोद्धार के चलते अल्बर्ट हाल करीब साल भर से बंद है। इस साल का पर्यटन सीजन निकलने को है, लेकिन अल्बर्ट हाल खुलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। क्योंकि जीर्णोद्धार का कार्य कछुआ गति से चल रहा है। हर साल औसतन 6 लाख पर्यटक अल्बर्ट हाल देखने आते हैं। इसके जीर्णोद्धार पर करीब साढ़े चार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
माना जा रहा है कि अधिकारियों में तालमेल की कमी और कई एजेंसियों में बंटे कार्य पर बेहतर नियंत्रण नहीं होने से कार्य गति नहीं पकड़ पाया। अब अलग-अलग एजेंसियों के काम आपस में टकरा रहे हैं, जिससे समूचे अल्बर्ट हाल में कार्य बिखरा हुआ है। पुरातत्व विभाग और एडीएमए की ओर से यह जीर्णोद्धार कार्य करवाया जा रहा है। अब दोनों विभाग धीमी गति से कार्य होने की जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाल रहे हैं।
पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि शहर के एक प्रमुख स्मारक को जो उसके 120 सालों में कभी कुछ सप्ताह भी बंद नहीं रहा, आखिर सालभर के लिए कैसे बंद रखा जा रहा है? पुरातत्व विभाग के पूर्व निदेशक इसे अव्यावहारिक और तानाशाही निर्णय करार देते हैं।
वादे हैं वादों का क्या?
अल्बर्ट हाल को 16 अप्रैल से बंद करने के छह महीने पहले से जीर्णोद्धार कार्य जारी है। कला एवं संस्कृति सचिव सलाउद्दीन अहमद ने अल्बर्ट हाल का दौरा कर कार्य की गति धीमी पाई, तो निर्माण कार्य देख रहे अधिकारियों ने पर्यटकों की आवाजाही को इसका कारण बताया। इसके बाद अल्बर्ट हाल को बंद कर जीर्णोद्धार कार्य की गति बढ़ाने का आदेश दिया गया।
पुरातत्व विभाग के निदेशक बी.एल. गुप्ता का कहना था कि अल्बर्ट हाल के अलग-अलग हिस्सों में कार्य पूरा कर इन हिस्सों को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा, लेकिन सारा कार्य अव्यवस्थित होने से अभी तक ऐसा नहीं हो पाया।
ममी की हालत नहीं सुधरी
जीर्णोद्धार कार्य के बावजूद अल्बर्ट हाल की मुख्य पहचान ‘ममी’ की हालत नहीं सुधरी है। पर्यटन व्यवसाय के जानकारों का कहना है कि विभाग अल्बर्ट हाल पर करोड़ों रुपए खर्च रहा है, जबकि डिस्प्ले सामान विभाग के पास पहले से मौजूद था। केवल हाइटैक बनाने के नाम पर सरकार की गाढ़ी कमाई पानी की तरह बहाई जा रही है।
बिगड़ता हेरिटेज
अन्य स्मारकों की तरह अल्बर्ट हाल को भी खासकर पर्यटन सीजन में खुला रखकर जीर्णोद्धार कार्य आगे बढ़ाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं होने से हर महीने औसतन पांच लाख रुपए का घाटा और सहना पड़ा पड़ेगा। साथ ही जिस तरह से जीर्णोद्धार हो रहा है, उससे ऐतिहासिक म्यूजियम का हेरिटेज स्वरूप बिगड़ रहा है। लापरवाही के चलते अधिकांश एंटिक दरवाजों के चित्रकारी किए शीशे टूट चुके हैं। दीवारों पर की गई पेंटिंग से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है।