न्यूयार्क.
बाजार में जाते ही खाने की चीजों को देखकर मन अनायास ही कुछ खाने को करता है। बेकरी के बगल से गुजरते समय ऐसा कौन सा आकर्षण होता है कि आप स्वयं को खाने की चीजें खरीदने से रोक नहीं पाते।नार्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओ ने भूख और मस्तिष्क के बीच संबंधों का रहस्योद्घाटन कर ऐसे ही सवालों का जवाब देने की कोशिश की है। अध्ययन के तहत कुछ लोगों को एक दिन आठ क्रीमी डोनट खिलाए गए और अगले दिन उन्हें आठ घंटे तक भूखा रखा गया।
अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि जब लोगों को डोनट खिलाने के बाद डोनट की तस्वीर दिखाई गई तो उनके मस्तिष्क में कोई विशेष सक्रियता नहीं थी। लेकिन आठ घंटे के उपवास के बाद जब उन्हें यही तस्वीरें दिखाई गईं तो उनके मस्तिष्क के दो खास हिस्से, जिनमें याददाश्त वाला हिस्सा शामिल था, खासे सक्रिय हो उठे।
फेनबर्ग विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान के व्याख्याता और वरिष्ठ लेखक मार्सेल मेसुलम ने कहा, ‘‘मस्तिष्क का एक हिस्सा महत्वपूर्ण चीजों को लेकर संवेदनशील होता है। वह ने केवल हमें बताता है कि हम भूखे हैं बल्कि वह खाने की चीजें देखकर सक्रिय भी हो जाता है। ’’ उन्होंने आगे बताया कि यदि मस्तिष्क का वह हिस्सा हमेशा सक्रिय रहे तो खाने की चीजें देखकर आप हमेशा खाने के इच्छुक रहेंगे न कि तब जब आप भूखे रहें।