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गोविंदा नहीं आला रे

नई दिल्ली. ऐसे तो गोविंदा के फिल्मों के सेट पर लेट होने की बाद कोई नई हैं लेकिन चार साल पहले जब गोविंदा को मुम्वई की जनता ने सांसद बनाया तो तब सबने यही सोचा था कि गोविंदा अब अपने पद का मान रखते हुए अपनी जिम्मेदारियों को ठीक ढ़ग से निभाएंगे, लेकिन वे गलत थे।

फिल्मों के सेट पर लेट ही सही गोविंदा पहुंचते तो थे, संसद में तो गोविंदा जाना भी जरुरी नहीं समझते। अगर हम संसद के अटेंडेंस रिकार्ड पर नजर डाले तो पता चलता है कि पिछले चार सालों में गोविंदा महज 10 प्रतिशत संसद सत्र में मौजूद थे।

2005 में 85 सत्रों में गोविंदा 15 सत्र में शामिल हुए, 2006 में 77 में से 7, 2007 में तो गोविंदा ने हद ही कर दी वें 66 सत्रों में सिर्फ 2 सत्र में शामिल हुए।

अब जब चुनाव नजदीक आ रहे है और कांग्रेस पार्टी चुनाव के तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं फिर भी गोविंदा के कानों में जूं नहीं रेंग रही हैं। वे इस साल एक भी संसद सत्र में उपस्थित नहीं हुए । रिकार्ड के मुताबिक गोविंदा ने सांसद के रुप में अपने चार साल के कार्यकाल में सिर्फ 2005 में दो बार एक-एक मिनट के लिए संसद में भाषण दिया है।





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