अजमेर. अल्पसंख्यक भाषी विद्यालयों में आठवीं बोर्ड परीक्षा पेपर आउट किए जाने का गोरखधंधा पिछले तीन-चार सालों से चल रहा था लेकिन इस बार शिक्षकों की आपसी कलह के कारण भांडा फृट गया। उधर, प्रारंभिक शिक्षा महकमे के अफसर मामला खुलने से दो दिन पहले संबंधित स्कूल में निरीक्षण के बावजूद गड़बड़ी को सूंघ नहीं पाए।
पेपर आउट होने के मामले में जिस स्कूल का नाम चर्चा में है उस राजकीय सिंधी डिग्गी मिडिल लोकल-2 की कार्यवाहक संस्था प्रधान गोदावरी वाधवानी ने गत 26 फरवरी को डीइओ शांतिलाल जैन को लिखित में शिकायत दी थी कि स्कूल का स्टाफ समय पर नहीं आता। समय के लिए पाबंद करने पर स्टाफ उनके साथ गाली-गलौज करता है। डीइओ ने 27 फरवरी को अवर उप जिला शिक्षा अधिकारी भगवती प्रसाद शर्मा को स्कूल की जांच के लिए भेजा। जहां शर्मा ने स्टाफ से बातचीत की और उन्हें झगड़ा करने की बजाय शिक्षण कार्य में मन लगाने की हिदायत दी।
शर्मा के मुताबिक उन्होंने स्कूल में गोदावरी वाधवानी, वासुदेव लख्यानी, हरीश लौंगानी समेत अन्य शिक्षकों से पूछताछ की थी। उस समय तो मामला सुलझा दिया गया था। लेकिन, दो दिन बाद ही किसी अध्यापक ने मीडिया तक पेपर की कॉपियां भेजकर पोल खोल दी। पेपर आउट प्रकरण में इस स्कूल के शिक्षकों के खिलाफ भी मसूदा थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई है।
तीन-चार वर्षो से थी गड़बड़
प्रशासनिक जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक पेपर लीक तीन-चार सालों से लगातार हो रहे थे। मगर इसका खुलासा नहीं हो पाया था। गड़बड़ करने का आरोप जिन शिक्षकों पर लगा है। वे शिक्षक लंबे समय से पेपर अनुवाद करने का कार्य कर रहे हैं। मगर शिक्षा विभाग ने उन पर ज्यादा गौर नहीं किया।
कार्यवाहक संस्था प्रधान गोदावरी वाधवानी की शिकायत पर जांच करवाई गई थी। पूछताछ एवं जांच में पेपर आउट के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं मिली।’
-शांतिलाल जैन, डीइओ, प्रारंभिक शिक्षा
शिक्षकों के आपसी झगड़े की शिकायत पर मुझे स्कूल में डीइओ ने जांच करने के लिए भेजा था। शिक्षकों में समझौता करवाने के बाद मैंने विद्यार्थियों के होमवर्क की कापियां चेक की थी। मुझे वहां पेपर से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं मिली।’
-भगवती प्रसाद शर्मा, अवर उप जिला शिक्षा अधिकारी