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राहुल और भारत की खोज

संपादकीय. कांग्रेस के युवा सांसद राहुल गांधी भारत की राजनीति को करीब से जानने के लिए बेकरार हैं। पिछले साल हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में उनके रोड शो का प्रत्याशित नतीजा न निकलने के बाद उन्होंने अब खुद ही भारत के सुदूर अंचलों में बसने वाले उस ‘आम आदमी’ के जीवन को करीब से देखने की सोची है, जिसे उनकी पार्टी ने अपने भविष्य की योजनाओं के केंद्र में रखा है।

पिछले दिनों उड़ीसा से उन्होंने अपनी इस ‘भारत की खोज’ यात्रा की शुरुआत की। गुरुवार को लोकसभा में आम बजट पर चर्चा के दौरान अपने भाषण में उन्होंने बजट को कांग्रेस की ‘आम आदमी’ नीति के अनुरूप बताते हुए किसानों की कर्ज माफी के मामले पर केंद्र के प्रस्ताव में और छूट देने का भी सुझाव दे डाला।

विशेष तौर पर उन्होंने किसानों की दशा के बारे में विदर्भ का जिक्र तो किया, लेकिन उड़ीसा का नहीं, जहां की यात्रा के दौरान उनका राज्य पुलिस द्वारा दी गई सुरक्षा को छोड़ अज्ञात स्थान का दौरा भी संसद में चर्चा का विषय बना। राजग के सदस्यों के राहुल गांधी द्वारा सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने पर आपत्ति जताने पर कांग्रेस द्वारा कोई सार्थक जवाब देने की बजाय पूरे मुद्दे को हल्के में लेने से मामले की गंभीरता पर ध्यान नहीं जा पाया।

एसपीजी सुरक्षा प्राप्त अति विशिष्ट व्यक्तियों की यात्रा के दौरान सुरक्षा के लिए उन्हें राज्य पुलिस की सुरक्षा भी मुहैया कराई तो जाती है, पर वह भीतरी घेरे तक नहीं होती। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा नक्सल प्रभावित कोरापुट जिले में रात में कई घंटे बिना राज्य पुलिस को बताए किसी अनजाने गंतव्य तक जाना एक गंभीर सुरक्षा चूक हो सकती थी, जिसकी अनदेखी हल्के में नहीं की जानी चाहिए।

राहुल गांधी का यह कहना कि उन्हें ‘आम आदमी’ से मिलने के लिए एसपीजी या पुलिस की जरूरत नहीं है, उनके उत्साह को तो दर्शाता है, पर क्या यह उत्साह सुरक्षा चिंताओं की कीमत पर होना चाहिए? राहुल गांधी की जल्दबाजी का कारण समझना मुश्किल नहीं है। उन्हें अगले कुछ महीनों में भारत के बहुत बड़े हिस्से की खोज करनी है और ऐसे तमाम मुद्दे भी पहचानने हैं जिन पर वह बिना लिखित तैयारी के बोल सकें।

इसके लिए उन्हें अपनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था असुविधाजनक लग सकती है। राहुल गांधी आज के परिप्रेक्ष्य में कोई मामूली राजनीतिज्ञ नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी के लिए वे भविष्य की आशा और सफलता के प्रतीक हैं और देश की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण भूमिका निभाना तय है। पर ऐसा करने के लिए उन्हें अपने से संबंधित कड़ी सुरक्षा के प्रति स्वयं भी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।





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