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गृहमंत्री ने माना हथियार लाइसेंसों में भ्रष्टाचार हुआ

जयपुर. विपक्ष ने लगाया बड़े अधिकारियों को बचाने का आरोप

गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने गुरुवार को विधानसभा में स्वीकार किया कि श्रीगंगानगर से हथियारों के लाइसेंस जारी करने में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ। इसी वजह से मामले की जांच पुलिस के अलावा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से भी कराई जा रही है। विपक्ष ने सरकार पर बड़े अफसरों को बचाने और छोटे अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आरोप लगाया।

शून्यकाल में कांग्रेस के संयम लोढ़ा ने स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से यह मामला उठाया था। गृहमंत्री ने कहा कि 2003 में ओपी महेन्द्रा के एक सवाल के जवाब में यह मामला सामने आया था। इसमें गंगानगर जिले में कुछ टोपीदार बंदूकों के लाइसेंस बारह बोर में बदलने की पुष्टि हुई थी। कुछ अन्य कमियां पाए जाने पर कलेक्टर को 19 मार्च, 2003 को ही जांच के लिए लिख दिया गया था। लाइसेंस मामलों में सीआईडी से छानबीन कराने के निर्देश दिए गए।

सीआईडी ने 16 प्रकरणों में छानबीन कर भारी अनियमितताएं पकड़ीं और पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई। बाद में दुबारा यह मामला सामने आने पर 16 जून 2007 को एक जांच कमेटी बनाकर फिर हथियार लाइसेंसों की जांच कराई गई। कमेटी की रिपोर्ट में 284 टोपीदार बंदूक के लाइसेंसों को बारह बोर और अन्य हथियारों में बदलना पाया गया। कटारिया ने कहा कि जांच में यह भी पता चला कि इसमें कुछ हद तक पैसों का भी लेन-देन हुआ है, इसलिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से भी जांच कराई जा रही है।

सवालों के घेरे में मंत्री

लोढ़ा ने आरोप लगाया कि पिस्टल के लाइसेंस पांच-पांच लाख रुपए में जारी कर दिए गए। ड्रग माफिया और डकैतों ने भी लाइसेंस बनवा लिए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में गोलमोल भाषा में बोलने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई करने की सदन में ही घोषणा करनी चाहिए।

कांग्रेस के ही प्रद्युम्न सिंह ने जानना चाहा कि तीन में से दो आरएएस को ही निलंबित किया, तीसरे के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? बाबू और चपरासी के खिलाफ कार्रवाई करने का औचित्य क्या है। हरिमोहन शर्मा ने भी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए।





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