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सूखा राहत के लिए 140 करोड़

भोपाल. सरकार प्रदेश में सड़क, बिजली और सिंचाई पर भरपूर खर्च कर रही है, इसलिए पूरक बजट लाया गया है। पिछली सरकार के जमाने में जनवरी से भुगतान और काम रोक दिए जाते थे, वर्तमान सरकार काम भी कर रही है और भुगतान भी। यह बात वित्त मंत्री राघवजी ने गुरूवार को वर्ष 2007-08 के तीसरे पूरक बजट पर चर्चा के उत्तर में कही। विपक्ष ने दिल्ली के दीनदयाल अनुसंधान केंद्र और प्रदेश में भजन मंडलियों को सहायता देने का विरोध किया।

तीसरा पूरक बजट लाए जाने पर विपक्षी सदस्यों के विरोध के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि हर सरकार तीन पूरक बजट लाती है, यह परिपाटी भी है और जरूरत भी। ऐसा भुगतान, एडजस्टमेंट और जरूरी पूंजी निवेश के लिए किया जाता है। विपक्ष की यह आशंका निराधार है कि 13 दिन में 21 सौ करोड़ रुपए का पूरक बजट कैसे खर्च होगा।

उन्होंने कहा कि बिजली कंपनी को 100 करोड़ रुपए पूंजी निवेश के लिए देने में एक ही दिन लगेगा और वित्त निगम को 60 करोड़ रुपए देना आधा घंटे में निपटने वाला काम है। सूखा राहत के लिए 140 करोड़ रुपए का इंतजाम किया गया है, इस मद में केंद्र से एक भी पैसा अब तक नहीं मिला है, यह दुर्भावना की बात है। उन्होंने राशि कम होने को लेकर कहा कि सरकार की अपनी सीमाएं हैं, फिर फिर भी सूखा मद में 625 करोड़ रुपए का इंतजाम किया ही है। वित्त मंत्री ने विपक्ष से सूखे के मामले में केंद्र से मदद पाने के लिए सर्वदलीय प्रयास की पहल का आग्रह किया।

वित्त मंत्री ने पूरक बजट में नई तहसीलों और जिलों के राशि के इंतजाम का जिक्र करते हुए कहा कि तहसीलें पहले बन जातीं लेकिन परिसीमन आयोग की वजह से प्रतिबंध था। आयोग की रिपोर्ट आते ही प्रतिबंध हटा और सरकार ने नई तहसीलें बना दीं। इनमें आठनेर, चिचोली, घोड़ा डोंगरी, शमशाबाद, त्योंदा, चंदिया, रेहटी, बाड़ी, महाराजपुर, देवेंद्रनगर, बक्सवाहा, घुवारा, रहटगांव, सेमरिया, मनगवां, दिलौरा, रैपुरा आदि शामिल हैं। और भी नई तहसीलें बनाई जाने की मांग पर वित्त मंत्री ने कहा कि व्यवधान हट गया है, इसलिए अब अन्य प्रस्ताव भी आ सकते हैं। वित्त मंत्री के उत्तर के बाद सदन ने 2070 करोड़ 36 लाख 31 हजार पांच सौ रुपए की अनुपूरक मांगों का प्रस्ताव और विनियोग विधेयक ध्वनि मत से पारित कर दिए।





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