बैतूल. वर्ष 2003 में नियुक्त संविदा शिक्षकों के अध्यापक संवर्ग में शामिल होने का मामला शासन और कोर्ट से गुजरने के बाद अब लोक शिक्षण संचालनालय में अटक गया है। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि संचालनालय से मूल्यांकन प्रपत्र का अभी तक जारी न होना है। प्रदेश के बैतूल जिले सहित करीब 12 हजार संविदा शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2003 में हुई थी।
इन संविदा शिक्षकों को अध्यापक संवर्ग में शामिल किए जाने की घोषणा भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर दी थी और अभिमत मिलने के बाद शासन ने भी 19 दिसंबर 07 को आदेश जारी कर दिया था,लेकिन लोक शिक्षण संचालनालय ने अपने 5 फरवरी 08 को जारी किए आदेश में शासन के 28 जून 07 को जारी आदेश की कंडिका 2.5 (क) का उल्लेख करते हुए बताया कि संविदा शाला शिक्षकों की तीन साल की अवधि पूर्ण करने पर छानबीन समिति द्वारा यह देखना है कि उनका कार्य वस्तुपरक मापदंडों के अनुसार संतोषजनक रहा हो। इसके लिए वस्तुपरक मूल्यांकन प्रपत्र में इसका ब्यौरा देना होगा।
इसके बाद ही संविदा शिक्षकों के अध्यापक संवर्ग में नियुक्ति की कार्रवाई की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश तो जारी कर दिए हैं,लेकिन यह मूल्यांकन प्रपत्र अभी तक जारी नहीं हुए हैं। इसके कारण वर्ष 2003 में नियुक्त संविदा शिक्षकों का मामला अभी भी अधर में लटका हुआ है।
क्या कहते हैं अधिकारी
बैतूल जिला पंचायत सीईओ बीएस जामोद ने बताया कि संविदा शिक्षकों के मामले में अभी तक कोई मूल्यांकन पत्रक उन्हें नहीं मिला है। उधर लोक शिक्षण संचालनालय की संविदा शाखा अधिकारी का कहना था कि मूल्यांकन प्रपत्र दो एक दिन में जारी हो जाएंगे। इधर संविदा शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पंजाबराव गायकवाड़ का कहना है कि यह एक लंबी प्रक्रिया है। इसे अध्यापक संवर्ग में नियुक्ति से दूर ही रखना चाहिए।