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परिवहन विभाग में औपचारिक हुआ फिटनेस टेस्ट

इंदौर. परिवहन विभाग में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस (टेस्ट) औपचारिकता बनकर रह गई है। नियम-कायदे तो हैं लेकिन पालन नहीं के बराबर होता है। बीच सड़क पर अधिकारी के सामने से वाहन गुजरता है और कागजों पर दस्तखत की खानापूर्ति हो जाती है। वाहन मालिक या ड्राइवर-क्लीनर फिटनेस से पहले आरटीओ के आसपास ही गाड़ी को दुरुस्त करते हैं। परिवहन अधिकारी भी इसे स्वीकारते हैं। उनका कहना है एकसाथ इतनी गाड़ियां आती हैं कि बारीकी से चेकिंग संभव नहीं।

कमर्शियल वाहनों का फिटनेस हर साल कराना अनिवार्य है। इसके लिए आरटीओ में ट्रक-डम्पर सहित करीब दो सौ वाहन रोज आते हैं और केसरबाग रोड पर ही खड़े हो जाते हैं। फिटनेस से पहले कोई ड्राइवर तार से नंबर प्लेट बांधता है तो कोई लाइट दुरुस्त करवाता मिलता है। इसके लिए आरटीओ के बाहर ही मैकेनिक, पेंटर भी मिल जाते हैं।

दोपहर में सड़क के एक ओर परिवहन अधिकारी खड़े हो जाते हैं। गाड़ियां गुजरती जाती हैं और फिटनेस मिलता जाता है। चेकिंग भी कभी हुई तो ठीक नहीं तो ऐसे ही गाड़ी पास हो जाती है।

सुधार तो हुआ है

फिटनेस का काम देखने वाले एआरटीओ एच.आर. रोहित भी स्वीकारते हैं ज्यादातर गाड़ियों के ड्राइवर-क्लीनर मौके पर ही खामियां दूर करते हैं। कमर्शियल वाहनों में कलर, ब्रेकलाइट, टेल लाइट व अन्य तकनीकी बातें देखकर ही फिटनेस देते हैं। रोजाना 20 प्रतिशत गाड़ियों का फिटनेस रद्द भी किया जाता है। फिटनेस के मामलों में पहले से सुधार हुआ है। जल्दी और सुधार करेंगे। पहले तो फिटनेस की खानापूर्ति गाड़ी आए बगैर ही हो जाती थी। सितंबर से सख्ती की गई। अब गाड़ी आने पर ही फिटनेस करते हैं। पहले स्टाफ भी कम था। अब छह आरटीआई मिल गए हैं इसलिए बारीकी से जांच की जाएगी।

घेर लेते हैं एजेंट और ड्राइवर-क्लीनर

फिटनेस के लिए एजेंट और ड्राइवर-क्लीनर अधिकारियों को घेर लेते हैं। कई बार भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि गाड़ी दिखाई नहीं देती। हारकर अधिकारी कागजों पर हस्ताक्षर करते रहते हैं।

लगता है जाम

फिटनेस पाने के लिए सड़क पर खड़े कमर्शियल वाहन केसरबाग रोड से गुजरने वाले अन्य वाहनों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। सप्ताह में तीन-चार बार जाम की स्थिति बनती है। कई बार तो फिटनेस के वाहनों की कतार काफी दूर तक निकल जाती है। परिवहन विभाग के अधिकारी भी यह स्वीकारते हैं। उनके मुताबिक नया भवन बनने पर यह दिक्कत खत्म हो जाएगी।

सभी की बारीकी से जांच संभव नहीं

फिटनेस के लिए रोजाना दो सौ गाड़ियां आती हैं। सभी की बारीकी से जांच संभव नहीं। अधिकारी तकनीकी बातें देखकर ही पास करते हैं। एक साल में फिटनेस प्रक्रिया में काफी सुधार किया है और भी करेंगे।

- गिरीशमोहन पाठक, आरटीओ





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