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शिक्षा पेढ़ी भंग करने की सिफारिश

इंदौर. हर साल करीब 20 करोड़ का जमा खर्च करने वाली 5000 शासकीय शिक्षकों की पेढ़ी में अनियमितताओं के चलते उसे भंग करने की सिफारिश सहकारिता की जांच अधिकारी द्वारा संयुक्त रजिस्ट्रार को की गई है। जांच में कर्मचारियों द्वारा अध्यक्ष सहित पूरी कार्यकारिणी को दोषी पाया गया है।

शिक्षकों की सहायता से संबंधित कई उद्देश्यों को लेकर 1917 को गठित हुई सहकारी कार्य संस्था, शिक्षा विभाग (पेढ़ी) अब भंग होने के कगार पर है। यहां के कर्मचारियों व सदस्यों द्वारा वर्तमान कार्यकारिणी व अध्यक्ष भगवती मिश्रा की कई तरह की शिकायतें सहकारिता विभाग में पिछले साल की गई थीं। इसके लिए विभाग द्वारा मोनिका सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त कर जांच करने को कहा गया था।

करीब डेढ़ माह पहले पूरी हुई जांच में श्रीमती सिंह ने कर्मचारी द्वारा अध्यक्ष पर लगाए गए बदसलूकी के अलावा कई आर्थिक अनियमितताओं को सही पाया। इसमें किसी को एक दिन में लाखों रुपए का ऋण देने तो किसी भी कर्मचारी को सारे नियमों को ताक पर रखकर बाहर करने, वहीं कर्मचारियों पर नए-नए मामलों पर आरोपी बनाने, मनमाफिक ठेके देने जैसे कई मामले हैं।

रिपोर्ट में लिखा गया है कि श्री मिश्रा ने दोनों हाथों से संस्था का धन लुटाकर वित्तीय हानि पहुंचाई है। इसमें उनका साथ देने वाली 15 सदस्यों की पूरी कार्यकारिणी को भी दोषी माना गया है। रिपोर्ट में लिखा है सहकारी समितियां अधिनियम का उक्त संस्था के पदाधिकारियों ने जमकर उल्लंघन किया इसलिए इसे भंग कर देना चाहिए। इसकी पुष्टि स्वयं श्रीमती ंिसंह ने की।

उक्त रिपोर्ट संयुक्त रजिस्ट्रार विष्णुप्रसाद मारण को पेश की गई जहां आयुक्त एवं पंजीयक भोपाल कार्यालय में करीब डेढ़ माह से अटकी है। सूत्रों के अनुसार इस पर अभी तक निर्णय नहीं करने के पीछे भोपाल के अधिकारियों पर कई रसूखदारों का दबाव है।

झूठ का पुलिंदा, सीबीआई से जांच करवाएं

मेरे खिलाफ जो रिपोर्ट श्रीमती सिंह ने पेश की वह झूठ का पुलिंदा है। मैंने एक पैसा भी पेढ़ी का दुरुपयोग नहीं किया। यहां तक कि संस्था के पैसों से चाय तक नहीं पी, चाहें तो इसकी सीबीआई से जांच करवा लें।

-भगवती मिश्रा, अध्यक्ष, शिक्षा पेढ़ी





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