इंदौर. यूनिवर्सिटी के आरएनटी मार्ग नालंदा परिसर में लगी आग के बाद अब सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हो गया है। रजिस्ट्रार ने तीन विभागों को नोटीस जारी कर जानकारी मांगने के बाद कर्मचारियों से भी पूछ-ताछ की है। आग लगने के स्थान पर सफाई शुरू हो गई है। यहां पर लापरवाही से बोरों में भरकर रखे अधजले कागज सामने आ रहे हैं।
आग लापरवाही के कारण लगी इस बात को यूनिवर्सिटी के अधिकारी भी स्वीकार रहे हैं । जबकि एक माह पहले ३क् जनवरी को रजिस्ट्रार ने सभी विभागों को पत्र लिख कर चेतावनी दी थी की अपने दस्तावेज आग, पानी, दीमक से बचाकर रखें जब भी यूनिवर्सिटी प्रशासन, उच्चशिक्षा विभाग, न्यायालय, राजभवन से कोई जानकारी मांगी जाएगी उस समय आपको दस्तावेज उपलब्ध कराना होंगे इसमें किसी प्रकार का बहाना नहीं चलेगा। लेकिन इस निर्देश पर किसी भी विभाग ने ध्यान देना उचित नहीं समझा।
प्रभारी मंत्री भी मांग रहे हैं जानकारी
जीएसीसी में 28 फरवरी की शाम कक्ष 44-बी में लगी आग का मामला भोपाल तक पहुंच गया है। अतिरिक्त संचालक उच्चशिक्षा ने पूरी जानकारी भोपाल भेज आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश मांगे हैं। वहीं प्रभारी मंत्री हिम्मत कोठारी भी जानकारी निकलवा रहे हैं। उधर, जिस कक्ष में आग लगी थी वह अब तक सील है। आग में काफी रिकॉर्ड जल गया था। घटना के समय प्राचार्य डॉ. अशोक वाजपेई और जनभागीदारी समिति के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिरोहिया कॉलेज में ही मौजूद थे।
जांच को लेकर प्राचार्य ने कहा हमने अतिरिक्त संचालक डॉ. एन.के. दाढ़ को जांच कमेटी बनाने के लिए लिख दिया था। डॉ. दाढ़ ने बताया प्राचार्य से कह कर भंवरकुंआ थाने पर प्रकरण दर्ज करा दिया था। आगे की कार्रवाई के लिए भोपाल से निर्देश मांगे हैं। प्रभारी मंत्री हिम्मत कोठारी ने कहा तब चुनाव में व्यस्त था इसलिए अब जानकारी निकलवा रहा हूं।