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50 चौराहों पर बने ही नहीं जेबरा क्रॉसिंग

इंदौर. शहर में 50 से ज्यादा चौराहों पर जेबरा क्रॉसिंग की जरूरत है लेकिन फंड की कमी के कारण बन नहीं पाते। वर्षो से 12 बड़े चौराहों पर ही ऐसे क्रॉसिंग बन रहे हैं, वह भी ट्रैफिक पुलिस के प्रयासों से। वैसे काम नगर निगम का है।

कलेक्टर की मौजूदगी में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यह मुद्दा उठा। ट्रैफिक पुलिस की ओर से बताया गया दिसंबर में सर्वे कर 50 से ज्यादा चौराहों की सूची बनाई थी, जहां जेबरा क्रॉसिंग और स्टाप लाइन की जरूरत है। इसकी जानकारी कलेक्टर के माध्यम से नगर निगम को भेजी थी लेकिन निगम ने रुचि नहीं ली। पैदल चलने वाले आसानी से सड़क पार कर लें और वाहन चालकों को भी आसानी हो इसलिए 8-10 साल से यातायात पुलिस फंड जुटाकर यह काम कर रही है। इसे बनाने में दो तरह के पेंट लगते हैं। थर्मो प्लास्टिक पेंट की मार्किग एक महीने चलती जबकि ऑइल पेंट की 10 दिन से ज्यादा नहीं। ऐसे में महंगे थर्मो प्लास्टिक पेंट का उपयोग ही किया जाता है।

जरूरत चौराहों की

पलासिया, लेंटर्न, नौलखा, टॉवर, प्रताप प्रतिमा (महू नाका) चौराहा पर जेबरा क्रॉसिंग व स्टाप लाइन बनाने में 20-20 लीटर पेंट लगता है। यशवंत रोड चौराहे पर 18 लीटर, हुकमचंद घंटाघर, हाईकोर्ट तिराहा, हिंदी साहित्य समिति चौराहा, वायरलेस तिराहा पर 10-10 लीटर, जेल रोड व कोठारी मार्केट चौराहों पर पांच-पांच लीटर पेंट लगता है। ट्रैफिक पुलिस की सूची में बाकी चौराहों पर कितना पेंट लगेगा इसकी जानकारी भी है।

डेढ़ सौ किलोमीटर सड़कों पर जरूरत है मार्किग की

शहर में 149 किलोमीटर सड़कों पर रोड मार्किग की जरूरत है। इसमें 30 किलोमीटर पार्किग की पट्टी भी शामिल है। ज्यादातर जगह मार्किग लगभग मिट गई है।





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