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मझधार में 10 हजार लोग

रायपुर. औद्योगिक इलाके के रांवाभाठा, सरोरा और बिरगांव के उन हिस्सों के लोग पांच सालों से मझधार में हैं, जिनको 2003 में हुए परिसीमन में न पंचायत में रखा गया और न ही बिरगांव पालिका में शामिल किए गए। हालत यह है कि पंचायत-पालिका के जरिए मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की रोशनी यहां नहीं पहुंची है। 2003 में हुए परिसीमन से पहले रावांभाठा, सरोरा और बिरगांव के लोग खुश थे। अपनी पंचायत थी, सरपंच थे। नगर निगम, नगर पालिका बिरगांव और औद्योगिक क्षेत्रों के सीमांकन के बाद मूलगांव तो बिरगांव पालिका में शामिल हो गए, पर इन गांवों की बस्तियों को शामिल नहीं किया। तकनीकी खामियों से छूट गए 10 हजार लोग पांच सालों से हलाकान हैं।

दैनिक भास्कर की टीम गुरुवार को जब इलाके में पहुंची, लोगों का दर्द चेहरे पर उभर आया। रावांभाठा का आधा हिस्सा इसलिए चाक-चौबंद है क्योंकि वह पालिका के क्षेत्र में है और आधा अब भी उधड़ा पड़ा है। पूर्व पंचायत सचिव द्वारिका साहू के मुताबिक छूटे हिस्से में 5000 लोग रहते हैं। इनमें 2500 मतदाता हैं। पांच सालों में यहां न सड़क बनी और न पानी, बिजली का इंतजाम हो पाया। पांच पंप में से केवल दो चालू हैं, गर्मी में ये भी सूख जाएंगे।

लेकिन मझधार में फंसे लोगों की सुध कोई भी एजेंसी नहीं लेगी। बिजली कनेक्शन नहीं है, इसलिए हूकिंग कर काम चलाया जा रहा है। धूल का गुबार, गंदगी इस हिस्से की पहचान है।

गांव के पंचू बंजारे बताते हैं कि बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र, मृत्यु प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहे हैं। पंचायत में थे तब के राशनकार्ड हैं, लेकिन यह अब मान्य नहीं है। न सस्ता चावल का लाभ मिल पा रहा है और न ही दूसरी सुविधाएं। स्व सहायता समूह चलाने वाली अनसुइया वर्मा बताती हैं कि छूटे हुए इलाके में पिछले पांच साल में कोई काम नहीं हुआ। पहले वे गांव में अपनी साथी महिलाओं के सहयोग से बहुत से काम करवाती थी। लेकिन पिछले चार साल से कोई काम नहीं कर पा रही हैं।

सरोरा के मजदूर नगर का हाल इससे जुदा नहीं है। सड़कों पर बड़े-बड़े गडढ्े इसकी पहचान हैं। औद्यागिक कचरे से रास्ता अटा पड़ा है। पांच बोर हैं, लेकिन पानी बदबूदार है। हूकिंग से यहां भी बिजली ली जा रही है। गांववालों का कहना है कि कनेक्शन लेने जाओं तो राशनकार्ड मांगा जाता है। चकरवाय गांव से यहां आकर बसे 75 वर्षीय सीताराम ने अपना मतदाता परिचयपत्र और पुराना राशन कार्ड लाकर दिखाया। उसने बताया कि अविभाजित सरोरा में मजदूर नगर वार्ड क्रमांक 20 में आता था। वे लोकसभा, विधानसभा और ग्राम पंचायत के चुनाव में वोट डाल चुके हैं। गरीबी रेखा कार्ड में पहले उन्हें राशन व अन्य सुविधाएं मिलती थी पर अब वे तमाम सुविधाएं बंद हो गई हैं। रावांभाठा के लोग इसी तरह की समस्या से जूझ रहे हैं।

बननी चाहिए पंचायत

रावांभाठा के विनोद शास्त्री ने करीब 300 लोगों के साथ मिलकर इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। उनका कहना है कि इन इलाकों को मिलाकर एक पंचायत का गठन किया जाना चाहिए। पंचायत नहीं बनती तो बिरगांव पालिका में शामिल करना चाहिए। इसके अभाव में गरीब लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं।

नोटिफिकेशन नहीं हुआ

कलेक्टर विकासशील ने बताया कि परिसीमन के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में आने वाली बस्तियों का नोटिफिकेशन नहीं हो पाने के कारण यह स्थिति बनी है। नोटीफिकेशन के लिए एसडीओ को निर्देश दिए गए हैं। यह ऐक तकनीकी प्रक्रिया है जिसमें वक्त लगता है। नोटिफिकेशन होने के बाद ही इनके संबंध में कोई फैसला हो पाएगा।





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