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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
रायपुर देश का ऐसा दूसरा शहर बनने जा रहा है, जहां बच्चों की विकलांगता को न सिर्फ रोका जाएगा बल्कि थैरेपी ट्रीटमेंट से सामान्य बच्चों की तरह काबिल बनाया जाएगा। समाज कल्याण विभाग ने माना में सेरेबल पालसी गैटलैब (एसपीजी) की स्थापना का फैसला किया है। अगले साल जनवरी से यहां इलाज शुरू हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि लैब में मासूमों को नया जीवन मिलेगा।
टेढ़े हाथ-पांव, अंग विच्छेद, मांसपेशियों में कमजोरी वाले बच्चों का यहां इलाज होगा। ऐसे बच्चों का भी परीक्षण किया जा सकेगा जो नकली अंग लगाकर संतुष्ट हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बच्चों को पूरी तरह ठीक करने में सफलता मिलने की उम्मीद है। फिजियोथैरेपिस्ट की ट्रेनिंग लेने वाले छात्रों के लिए रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। राष्ट्रीय न्यास अधिनियम 1999 में इस तरह के बच्चों के लिए इलाज का प्रावधान है। प्रदेश में 41 सरकारी और गैरसरकारी संस्थाएं हैं। इनमें 2509 निशक्त बच्चों की देखरेख की जा रही है। माना में ही ऐसी चार संस्थाएं हैं।
दृष्टिहीन, श्रवणबाधित, गूंगे व मानसिक विकलांग बच्चों का इलाज शासन द्वारा अधिकृत डाक्टरों द्वारा किया जाता है। दूर-दराज की संस्थाओं को जिला अस्पतालों तक बच्चों को लाना पड़ता है। विभाग की मंत्री लता उसेंडी का कहना है कि उनकी यह दिली ख्वाहिश थी कि निशक्त बच्चों को राज्य में ही इलाज की उच्चस्तरीय सुविधा मिले। मुख्यमंत्री डा. रमनसिंह ने भी बच्चों के हित में इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी।
कैसे होगा इलाज —
विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिमस्तिष्क अंगघात से पीड़ित बच्चों का इलाज अब तक न्यूरो सर्जन ही किया करते हैं। जन्म के समय ब्रेन में खाली जगह रह जाने की वजह से ब्रेन की बीमारी हो जाती है। इस वजह से बच्चों में सेंस और अंग संचालित करने वाले तत्व निष्क्रिय हो जाते हैं। जिन अंगों की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती है। उन मांसपेशियों की पहचान करने बच्चों की गतिविधियों की वीडियो शूटिंग की जा जाती है। फिर यह पहचान कर कौन सा हिस्सा दिमाग के कंट्रोल से बाहर है, उसका विशेष तकनीक से इलाज किया जाता है। यह दो चरणों में होगा। पहला 6 साल के बच्चों के लिए और दूसरा 7 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए।
लैब में क्या-क्या—-
0 ट्रिटमेंट के लिए विदेशी मशीनें
0 फिजियोथैरेपिस्ट
0 बायो इंजीनियर्स
0 नर्सिग स्टाफ
0 स्पेशल एजुकेटर्स
छग की एक ओर राष्ट्रीय उपलब्धि —
समाज कल्याण विभाग के उपसचिव राजेश तिवारी के अनुसार छत्तीसगढ़ दूसरा ऐसा राज्य हो जाएगा जहां एसपीजी लैब होगी। अब तक देश में वैलूर में ही इस तरह का डायग्नोस्टिक सेंटर है। मशहूर गेंदबाज हरभजन सिंह के गेंदबाजी एक्शन पर संदेह होने पर आईसीसी ने ऐसी ही लैब में परीक्षण कराया था।
‘अब तक विकलांगता से लड़ने समुचित तकनीकी इंतजाम न होने की वजह से पालकों के लिए बच्चों का इलाज कराना बड़ी समस्या थी। सरकार ने इस पहलू पर संवेदनशीलता से विचार कर बड़ा निर्णय लिया। बजट में भी इसे मंजूर कर लिया गया। ’
पीपी सोती, संचालक समाज कल्याण विभाग