जयपुर. डिग्गी रोड पर सिल्वर सिटी टाउनशिप को जेडीए से अप्रूव्ड बताकर भूखंडों की बुकिंग करने वाले डवलपर के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। उसपर पिछले दो साल में दिल्ली के अखबारों में विज्ञापन निकालकर करोड़ों रुपए हड़पने का आरोप है।
भूखंडों का कब्जा लेने जयपुर आए लोगों के होश उस समय उड़ गए जब उनको मौके पर इस नामकी कोई योजना और न ही डवलपर का कोई बोर्ड मिला। तब उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जेडीए से सूचना मांगी और 23 फरवरी 2008 को दिल्ली के कनॉट प्लेस पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया।
दिल्ली पुलिस की टीम मामले की जांच पड़ताल के लिए दो दिन से जयपुर में डेरा डाले हुए है। जांच अधिकारी व कनॉट प्लेस थाने के सब इंस्पेक्टर कुमार कुंदन ने बताया कि दिल्ली की यू टर्न हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ 42 लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी। जांच शुरू करने के बाद शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि प्रकरण में जेडीए के जोन-11 के उपायुक्त को नोटिस जारी करके रिकॉर्ड तलब किया गया है। साथ ही सिल्वर सिटी से जुड़े जयपुर के राजस्थान लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लि. की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस कंपनी ने डिग्गी रोड पर पंवालिया, टीलावाला व रूपवास गांव में सिल्वर सिटी योजना के नाम पर लोगों से भूखंडों की बुकिंग की है।
सिल्वर सिटी-द्वितीय का इरादा
यू टर्न हाउसिंग प्रालि ने 9 फरवरी 2008 को फिर से दिल्ली के अखबार में विज्ञापन जारी कर दिया, पर दिल्ली पुलिस की उस पर नजर पड़ गई। नए विज्ञापन में यह कंपनी जयपुर की डिग्गी रोड स्थित सिल्वर सिटी में सारे भूखंड बुक होने का दावा करके शीघ्र ही सिल्वर सिटी-द्वितीय लांच करने की बात कह रही है।
सूचना अधिकार ने खोली पोल
यू-टर्न की ओर से 2006 में जिन भूखंडों की बुकिंग की गई, उनके निवेशकों को जब तय अवधि में कब्जा नहीं मिला तो उन्होंने मार्च 2007 में सूचना के अधिकार के तहत जेडीए से सिल्वर सिटी योजना की जानकारी मांगी। जवाब में बताया गया कि यू-टर्न हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इस नाम की कोई योजना नहीं है।
सिल्वर सिटी नामक योजना का न तो लैंडयूज चैंज हुआ है और न ही नक्शा जारी किया गया। यह प्रक्रिया पूरी हुए बिना योजना का विज्ञापन करना अवैध है। दिल्ली पुलिस की टीम को हमने कुछ रिकॉर्ड दे दिया है, बाकी सूचना जल्दी ही भेज दी जाएगी।
—अरुण गर्ग,जोन उपायुक्त-11, जेडीए