जयपुर. आयकर विभाग की बैंकिंग कैश ट्रांजेक्शन टैक्स (बीसीटीटी) शाखा ने गुरुवार को कमीशन पर फर्जी बिल जारी करने वाली फर्मो के आठ ठिकानों पर सर्वे की कार्रवाई करते हुए 12 करोड़ रुपए के फर्जी लेन-देन का खुलासा किया। पिछले दस दिनों में ऐसा लेन-देन 192 करोड़ पर पहुंच गया है।
विभाग ने यह कार्रवाई मानसरोवर, वैशाली नगर व जौहरी बाजार क्षेत्र में स्थित फर्मो के ठिकानों पर की। अन्वेक्षण महानिदेशक डॉ. पूनम किशोर सक्सेना व निदेशक डीएस चोपड़ा के निर्देशन में यह कार्रवाई की। देर रात तक विभाग की टीमों की जांच की कार्रवाई जारी थी।
आयकर विभाग ने 3 मार्च से शुरु किए बीसीटीटी सर्वे की कार्रवाई में गुरुवार तक दस दिन की अवधि में 192 करोड़ रुपए से भी अधिक फर्जी लेन-देन का खुलासा किया। तीन फर्मों के नौ ठिकानों पर हुई कार्रवाई में विभाग ने 130 करोड़ रुपए के फर्जी लेन-देन का खुलासा किया। 12 मार्च की कार्रवाई में 13 ठिकानों पर बीसीटीटी सर्वे में 50 करोड़ रुपए से अधिक के फर्जी लेन-देन की जानकारी मिली। यह कार्रवाई चित्रकूट, वैशाली नगर, ब्रहपुरी व टोंक रोड स्थित ठिकानों पर की गई थी।
कैसे होता है फर्जी बिल से लेन-देन
फर्जी बिल जारी करने वाली कमीशन एजेंट फर्म रजिस्टर्ड फर्म होती है। यह बाकायदा अपना टिन नंबर भी लेती है। यह फर्म मामूली कमीशन पर व्यवसायियों को बिल जारी करती है। बिल राशि का भुगतान फर्जी खरीदार द्वारा चैक से फर्म को किया जाता है। फर्म इस चेक को अपनी बैंक में पेश कर इसकी राशि को नकद ले लेती है और अपना कमीशन काटकर इस राशि को खरीदार को वापस कर देती है।
कौन से व्यवसायी लेते हैं इनसे बिल
आम तौर पर जवाहरात व्यवसाय व कपड़ा उद्योग से जुड़े कारोबारी टैक्स बचाने के लिए फर्जी बिल एजेंटों से बिल लेते हैं। फर्जी बिल के आधार पर ये व्यवसायी कम कीमत के माल को अधिक कीमत में खरीदना बताते हैं और बाद में माल की कीमत वापस बिल एजेंट से ले लेते हैं।
क्यों नहीं होती दोषियों को सजा
ये मामले जब आयकर अपीलीय अधिकरण में जाते हैं तो आयकर विभाग यह तथ्य प्रमाणित करने में विफल रहता है कि कमीशन एजेंट फर्म ने क्रेता को जारी किए बिल की राशि नकद में उसे अदा की है। इस कारण से दोषी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो पाती और वह साफ बच निकलता है।
जून, 2007 में ही स्थापित हुई है शाखा
आयकर विभाग ने फर्जी लेन-देन पर शिकंजा कसने के लिए बैंकिंग कैश ट्रांजेक्शन टैक्स (बीसीटीटी) शाखा को जून माह में ही जयपुर में स्थापित किया है। इस शाखा के सुखद परिणाम भी कुछ माह में ही देखने को मिले हैं।