नई दिल्ली. अपने अंदरूनी मतभेदों के कारण नागरिक परमाणु करार पर आगे नहीं बढ़ पा रही केंद्र सरकार के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का आश्वासन अच्छी खबर हो सकता है जिसमें उन्होंने कहा कि अगली अमेरिकी सरकार करार को सुरक्षित रखेगी, ऐसा नहीं है कि बुश सरकार के बाद यह करार खत्म हो जाएगा।
समझौते को भारत और अमेरिका दोनों के लिए 'अच्छा' बताते हुए क्लिंटन ने कहा कि यदि आपको इस बात की जानकारी है कि परमाणु ऊर्जा से क्या किया जा सकता है तो यह समझौता आपके लिए अच्छा है।
क्लिंटन ने कल सैटेलाइट के जरिये 'इंडिया टुडे कानक्लेव' में अपने प्रमुख भाषण में कहा कि अमेरिका में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में किए गए समझौतों का सम्मान किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश चाहें तो समझौते के कुछ अंशों पर पुनर्विचार जरूर किया जा सकता है।
दो बार अमेरिकी राष्ट्रपति रह चुके क्लिंटन से जब यह पूछा गया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस तरह का समझौता क्यों नहीं किया तो उन्होंने कहा कि उनके समय में स्थितियाँ भिन्न थीं, क्योंकि उनके समक्ष अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे थे।
उन्होंने कहा कि उस समय परमाणु अप्रसार पर मेरा नजरिया भिन्न था। इसके अलावा मैं नहीं चाहता था कि चीन क्षेत्र में हथियारों की दौड़ शुरू करे।
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