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प्रत्येक भारतीय को कहीं भी रहने का अधिकार

नई दिल्ली. प्रवासी उत्तर भारतीय मुद्दे पर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र नवनिमार्ण सेना के प्रमुख राज ठाकरे को चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि भारत में प्रत्येक भारतीय को कहीं भी रहने,खाने,पीने,कमाने की पूरी स्वतंत्रता है।

न्यायमूर्ति एच के सीमा और मार्कडेय काटजू की खंडपीठ ने टिप्पणी की भारत कोई संघ या राज्यों का परिसंघ नहीं है, बल्कि यह यह राज्यों का संघ है और यहां केवल एक ही राष्ट्रीयता भारतीय है। इसलिए प्रत्येक भारतीय को भारत में कहीं भी आने जाने, कहीं भी बसने और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी पसंद का काम करने का अधिकार है। सुप्रीमकोर्ट ने कुछ वर्गो के लोगों के उन मुद्दों को लेकर हिंसा में लिप्त होने के बढ़ते चलन की निंदा की, जिनसे वे इत्तफाक नहीं रखते।

न्यायमूर्ति काटजू ने आदेश दिया कि दुर्भाग्यवश आजकल लोग महज किसी पुस्तक या पेंटिंग या फिल्म के विषय से भावनाओं के आहत होने का हवाला देते हुए विरोध-प्रदर्शन करने लगते हैं और यदाकदा हिंसा पर उतारू हो जाते हैं।

सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि ऐसे चलन से देश टुकड़े-टुकड़े में बंट सकता है और हमें इससे सख्ती से निपटने की जरूरत है। खंडपीठ ने कहा कि हम एक राष्ट्र हैं और हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए तथा संयम बरतना चाहिए। सुप्रीमकोर्ट ने तमिल कवि सुब्रह्मण्यम भारती का हवाला देते हुए कहा कि इस भारत माता के करोड़ों चेहरे हैं, लेकिन उनका शरीर एक है। वह 18 भाषाएं बोलती हैं, लेकिन उनका विचार एक है।





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