जयपुर. ठेकेदार लॉबी के दबाव और मंत्री के चहेतों को पदोन्नति का लाभ देने के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग में कनिष्ठ अभियंता का पद समाप्त किया जा रहा है। इस पद को अपग्रेड कर सहायक अभियंता बनाया जा रहा है। विभाग में पिछले साल ही कनिष्ठ अभियंता के 278 पद समाप्त किए जा चुके हैं।
राजस्थान कौंसिल ऑफ डिप्लोमा इंजीनियर्स के प्रांतीय महासचिव राजेंद्र प्रसाद पचौरी ने आरोप लगाया कि पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ ने 12 मार्च को राज्य विधानसभा में इस संबंध में गलतबयानी की। मंत्री ने सदन में कहा था कि कनिष्ठ अभियंता के 278 पद क्रमोन्नत किए गए हैं जबकि वित्त विभाग की सहमति पर पीडब्ल्यूडी के उपसचिव ने 12 अप्रैल, 07 के आदेश में इन पदों को समाप्त कर दिया था।
पचौरी के अनुसार 278 पद समाप्ति के बाद पीडब्ल्यूडी में अभी कनिष्ठ अभियंताओं का 621 का कॉडर है। इनमें वर्ष 96 में 94 डिप्लोमाधारी और 57 डिग्रीधारी कनिष्ठ अभियंता के पद पर भर्ती हुए थे। इसके बाद भी विभिन्न कोटे में कुछ अभियंता और भर्ती हुए थे।
पचौरी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी मंत्री ने सदन में बार-बार कहा कि 25-25 साल के कनिष्ठ अभियंताओं को पदोन्नति देने के लिए सभी पदों को अपग्रेड किया जा रहा है, जबकि सच्चई इससे अलग है।
विभाग में सहायक अभियंता पदों की डीपीसी तीन-चार साल से नहीं हुई है। अगर यह डीपीसी हो जाए तो 23 से 25 वर्ष के कनिष्ठ अभियंता पदोन्नत हो जाएंगे और अगर सहायक अभियंताओं के खाली पड़े सभी तीन सौ पदों पर पदोन्नति दे दी जाए तो 18-20 साल तक के सभी कनिष्ठ अभियंता पदोन्नति पा सकते हैं।
जेईएन की कई वर्र्षो से पदोन्नतियां नहीं हुई थीं, इससे उनमें कुंठा पनप रही थी। सरकार ने वनटाइम पैकेज बनाकर इन पदों को पदोन्नत किया है। जरूरत पड़ी तो जेईएन के पदों पर सरकार भर्ती भी करेगी।
—राजेंद्रसिंह राठौड़, पीडब्ल्यूडी मंत्री