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पाक अखबारों ने की रिहाई की तरफदारी

अमृतसरपाकिस्तान के उदारवादी अखबारों ने सरबजीत की रिहाई की तरफदारी की है। अधिकांश अखबारों ने सरबजीत के खिलाफ डेथ वारंट जारी होने की खबर को ज्यादा महत्व नहीं दिया है। हालांकि अधिकतर उर्दू अखबार कट्टरपंथियों की भाषा बोल रहे हैं।

फांसी की सजा खत्म हो : ‘आज कल’ ने लिखा है कि 17 साल की सजा बहुत होती है और अब सरबजीत को आजाद कर देना चाहिए। अखबार ने पाकिस्तान में फांसी की सजा का सामना कर रहे सात हजार से अधिक लोगों का वास्ता देते हुए मौत की सजा खत्म करने की मांग की है। इस मामले में अंग्रेजी अखबारों का नजरिया भी सकारात्मक है।

आम लोग उदासीन :

‘नवा जमाना’ के संपादक सुहैब आदिल ने बताया कि ज्यादातर अखबारों ने डेथ वारंट जारी होने को साधारण खबर की तरह प्रकाशित किया है। इस खबर की आम लोगों में कोई खास प्रतिक्रिया नहीं हुई है।

‘भारत पहल करे तो बात बन सकती है’लाहौर के मशहूर वकील व पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में सरबजीत के मामले की पैरवी करने वाले राणा अब्दुल हमीद के मुताबिक भारत यदि पाकिस्तानी कैदियों को रिहा करे तो बात अब भी बन सकती है। राणा ने फोन पर बताया कि न सिर्फ सरबजीत ने इकबालिया ब्यान में बम धमाकों की जिम्मेदारी कबूल की थी, बल्कि उसके खिलाफ चश्मदीद गवाहों ने गवाही दी है।

इसके मद्देनजर उसके बचने का कोई रास्ता नहीं है। अगर इस मसले पर दोनों देशों की सरकारों के बीच बातचीत शुरू होती है तो कोई नया रास्ता निकल सकता है, लेकिन पहल हिंदुस्तान को ही करनी होगी।





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