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रब ही रिहा कराएगा मेरे पति को

तरनतारन/भिखीविंड. ‘नेता अब भी दिलासा दे रहे हैं..सालों से यही करते रहे हैं, अब तो रब का ही आसरा है। वही चाहेगा तो मेरा पति लौटेगा। अब मैं उन्हीं के आगे हाथ पसार रही हूं।’ ये कहना है सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत कौर का, जिसने सरबजीत के डेथ वारंट जारी होने की खबर सुनने के बाद से खाना-पीना छोड़ दिया है।

गांव में नहीं जला चूल्हा :

सरबजीत की खबर मिलते ही भिखीविंड के लोगों में शोक की लहर रही। रविवार को उसके गांव में चूल्हा तक नहीं जला, सोमवार को भी अधिकतर घरों के लोग सरबजीत की पत्नी को सांत्वना देते रहे।

रिहाई के लिए अरदास :ग्रामीणों ने सुखप्रीत और उनकी बेटियों के साथ गांव के गुरुद्वारे में जाकर सरबजीत की रिहाई के लिए अरदास की। इसके लिए अलावा तरनतारन और नवाज शरीफ के पैतृक गांव उमरानंगल में भी सरबजीत की सलामती के लिए अरदास की गई।

हमें भी अपने पिता की जरूरत

सोमवार को उस समय माहौल अधिक भावुक हो गया, जब सर्बजीत की बड़ी बेटी स्वपनदीप कौर सूचना पाकर जालंधर से भिखीविंड घर आ गई। दोनों बेटियां अपनी मां सुखप्रीत के गले लगकर रोनी लग पड़ी। स्वप्नदीप ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री और अन्य सभी नेताओं के अलावा पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ आदि सभी के हमारे तरह बच्चे हैं। सभी नेताओं को सोचना चाहिए कि यदि उनके बच्चों को उनकी आवश्यकता है, तो हमकों भी हमारे पिता की आवश्यकता है। हमारे पिता बेकसूर हैं। दोनों बहनों ने अपने घर में परमात्मा की पूजा की।

विरोध में प्रदर्शन

भिखीविंड के मैन चौक में स्थानीय लोगों ने सुखप्रीत को साथ लेकर सर्बजीत की रिहाई के लिए नारेबाजी की। दुकानदारों ने कुछ समय के लिए दुकाने भी बंद रखीं। उनका कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो हम दिल्ली तक जाकर प्रदर्शन करेंगे।





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