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सीमेंट सप्लाई बंद, लोहा हुआ ‘लाल’

भोपाल. राजधानी में मकान बनाने का सपना संजोने वालों के माथे पर चिंता की लकीर खिंच गई है। एक तरफ तो सीमेंट मिल नहीं रही है, वहीं दूसरी तरफ तीन महीने में लोहे के भाव में करीब 12 हजार से 15 हजार रुपए प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है। इन हालातों के चलते मकान निर्माण की सामग्री के दाम डेढ़ गुना बढ़ गए हैं। यानी चार महीने पहले प्रति वर्गफुट निर्माण पर एक हजार रुपए की सामग्री लगती थी, अब वहां डेढ़ हजार रुपए खर्च हो रहे हैं।

निर्माण कार्य में मूल रूप से उपयोग में आने वाले सामान सीमेंट, लोहा और रेत के भाव इस समय आसमान पर हैं। सबसे ज्यादा असर लोहे पर पड़ा है। इस वक्त लोहा 45 रुपए किलो चल रहा है जबकि कुछ समय पहले यह 30 रुपए किलो था। पिछले तीन महीनों में कंस्ट्रक्शन कास्ट 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गई है। इसका असर व्यवसाय पर भी पड़ रहा है। बिल्डर्स का कहना है कि उनकी लागत पर असर पड़ रहा है जिसे वे अपने ग्राहकों से वसूलेंगे और उनका बजट गड़बड़ाना लाजमी है।

सीमेंट की सप्लाई ठप

भोपाल और आसपास के इलाकों में इन दिनों सीमेंट की खासी शार्टेज चल रही है। इसकी मुख्य वजह सीमेंट की सप्लाई न होना है। कंस्ट्रक्शन व्यवसायियों के मुताबिक कंपनियां रेट बढ़ाने की गरज से ऐसा कर रही हैं। शहर में सीमेंट की कमी होने के कारण कई स्थानों पर मनमाने रेट पर सीमेंट बिक रहा है। सीमेंट कंपनी अधिकारियों का कहना है कि रेलवे रैक न मिलने की वजह से सीमेंट की कमी चल रही है।

रेलवे ने इस पर रोक लगा रखी है। सीमेंट व्यवसायी और बिल्डर बताते हैं कि कंपनियां कृत्रिम कमी पैदा करना चाहती है जिससे रेट बढ़ जाएं। विक्रेताओं के मुताबिक विभिन्न कंपनियों की सीमेंट 206 से 215 रुपए प्रति बोरी तक बिक रही है। भोपाल के आसपास करीब 50 हजार टन मासिक सीमेंट की खपत होती है।

काम पर पड़ रहा असर

बिल्डर्स कहते हैं कि सीमेंट की कमी का असर उनके काम पर पड़ रहा है। अब वे अपने काम को निर्धारित समय पर नहीं कर पाएंगे। वे कहते हैं कि जिस तारीख पर हमें काम खत्म करके मकान ग्राहक को सौंपना है उसकी तारीख बढ़ेगी। काम देर से खत्म होने पर सीधा असर लागत पर पड़ेगा।





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