भोपाल. नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी द्वारा रविवार को सिवनी मालवा में लाड़ली लक्ष्मी योजना को लेकर की गई एक टिप्पणी को लेकर सोमवार को विधानसभा में लगभग आधा घंटा हंगामा मचा। हंगामे के दौरान जमकर नारेबाजी हुई और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखे आरोपों का आदान-प्रदान हुआ।
हंगामा इतना जबरदस्त था कि विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी को दस मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बारहवीं विधानसभा में ऐसे कम ही अवसर आए जब सदन की कार्यवाही स्थगित हुई हो। जमुना देवी की टिप्पणी पर शून्यकाल में भाजपा की सुधा जैन समेत अनेक महिला विधायकों ने आपत्ति उठाई।
उन्होंने कहा कि जमुना देवी ने समूची नारी जाति का अपमान किया है। हंगामे में सत्ता पक्ष से मंत्री कुसुम महदेले, नरोत्तम मिश्रा और अनूप मिश्रा के अलावा विधायक लाल सिंह आर्य, कैलाश चावला, उषा ठाकुर, सोनाबाई आदि ने हिस्सा लिया। सत्ता पक्ष के विधायक इस बात के लिए दबाव बना रहे थे कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी टिप्पणी के लिए खेद जताना चाहिए। इस पर विपक्ष की नेता जमुना देवी समेत विपक्ष के अनेक विधायकों ने एतराज जताते हुए कहा कि उनके द्वारा कोई गलत बात नहीं कही गई। जमुना देवी ने कहा कि उनका कहने का आशय यह था कि लाड़ली लक्ष्मी योजना कभी भी बंद हो सकती है।
सत्ता पक्ष के विधायक नेता प्रतिपक्ष की इस सफाई से संतुष्ट नहीं थे। वे अपनी मांग पर अड़े रहे। दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हुई जिस पर नियंत्रण न होते देख अध्यक्ष ने सदन की कार्रवाई दस मिनट के लिए स्थगित कर दी। दोबारा सदन की कार्रवाई शुरू होते ही कुसुम मेहदेले ने मामला उठाते हुए जमुना देवी से खेद व्यक्त करने की मांग की। जमुना देवी ने फिर खड़े होकर कहा कि उन्होंने किसी का अपमान नहीं किया।
अध्यक्ष के बार-बार रोकने के बावजूद न सत्ता पक्ष और न विपक्ष के विधायक शांत होने को तैयार थे। विपक्ष ने नेता प्रतिपक्ष के बारे में कही बातों को विलोपित करने की मांग की। श्री रोहाणी ने कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ किसी भी टिप्पणी की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इसके बावजूद संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा कुछ बोलने के लिए अध्यक्ष की अनुमति लेने लगे। कांग्रेस के सज्जनसिंह वर्मा ने अध्यक्ष से पूछा कि आपकी व्यवस्था के बाद ये किस नियम के तहत बोल रहे हैं। श्री मिश्रा ने जवाब दिया कि वे अध्यक्ष की अनुमति से बोल रहे हैं। इस बात पर फिर सदन में हंगामा हो गया। बाद में अध्यक्ष द्वारा सख्ती के साथ सभी को चुप कराने के बाद ही मामला ठंडा हो पाया।
विधानसभा का बजट सत्र कल समाप्त होगा
विधानसभा का बजट सत्र निर्धारित समय से 16 दिन पहले 19 मार्च को समाप्त हो जाएगा। भारी हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ईश्वरदास रोहाणी ने सदन में सोमवार को कार्यमंत्रणा समिति की सिफारिशों को पढ़ा। इनको संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा की सिफारिश पर सदन ने अनुमोदित किया। प्रतिवेदन में 19 मार्च को सभी सरकारी कार्य संपादित हो जाने के बाद सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की सिफारिश की गई।
समिति ने प्रतिवेदन में न्यायालय फीस मप्र संशोधन विधेयक २क्क्८, मप्र निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक और मप्र कॉटन कंट्रोल (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के लिए क्रमश: 30-30 मिनट का समय निर्धारित किया है। सूत्रों के अनुसार सरकार द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष की वेतन वृद्धि का विधेयक पेश किए जाने की भी तैयारी है।
बजट सत्र २५ फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण के साथ शुरू हुआ था। सत्र में चार अप्रैल तक कुल 22 बैठकें प्रस्तावित थीं। निर्धारित समय से पहले सत्र समाप्त होने से कुल १६ बैठकें ही होंगी।