जयपुर. कुशल वित्तीय प्रबंधन का दावा करने वाली राज्य सरकार पिछले वित्तीय वर्ष में 3342.62 करोड़ रुपए का राजस्व वसूल ही नहीं कर पाई। केवल टैक्स कम लगाने से ही 1422.63 करोड़ रु. का नुकसान हुआ है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए प्रतिवेदन के अनुसार जिन विभागों में कम वसूली हुई है, उनमें वाणिज्यिक कर, आबकारी, परिवहन, मुद्रांक एवं पंजीयन शुल्क, भू-राजस्व, अलौह खनन एवं धातु कर्म उद्योग प्रमुख हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य सरकार के इन विभागों ने वित्तीय वर्ष के दौरान 10, 879 मामलों में 133.86 करोड़ रुपए के ऑडिट पैरा में की गई टिप्पणियों को स्वीकार किया है। इसका परिणाम यह रहा कि 2397 प्रकरणों में सरकार 13.86 करोड़ रुपए की वसूली कर पाई।
इससे पहले के पांच सालों में विभिन्न विभागों ने 652.41 करोड़ रुपए की राशि के ऑडिट पैरा स्वीकार किए। इससे 30 सितंबर, 2007 तक ऑडिट पैरा के आधार पर 104.16 करोड़ रुपए वसूले जा चुके थे।