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रजवाड़े वाटर लिफ्टिंग सिस्टम देखेंगे पर्यटक

जयपुर. Waterक्या आपको मालूम है कि 17वीं शताब्दी में आमेर के मावठे का पानी मानसिंह महल के टांके तक कैसे पहुंचाया जाता था? इस सवाल का जवाब है केसर क्यारी के ठीक बगल में बना वह पांच मंजिला रहट सिस्टम, जिसको अंदर से देखने की पर्यटकों की तमन्ना मंगलवार से पूरी हो जाएगी।

महल के अधिकारी बताते हैं कि इसमें रहट को कहीं बैल से तो कहीं मजूदरों के जरिए चलाया जाता था। रहट चलने पर सिस्टम की पहली मंजिल का टैंक भरा जाता, जिसकी दीवारों के ऊपर बनी नालियों के जरिए दूसरी मंजिल के टैंक तक पानी पहुंचाया जाता था। इसी तरह से बाकी मंजिलों तक पानी पहुंचता रहता था।

इसके अलावा पर्यटकों को महल के तापमान को सामान्य रखने वाले पुराने इंतजाम भी दिखाए जाएंगे। आमेर महल के अधीक्षक जफरउल्लाह खान के मुताबिक महल के अंदर के हिस्सों मे पानी सप्लाई करने के लिए सकोरों की पाइप बनी हुई है।

तापमान को सामान्य बनाए रखने के लिए इसी तरह की पाइप लाइन के जरिए सुख निवास के ऊपर बने टांके तक पानी पहुंचाया जाता था। इसमें जमा पानी को सुख निवास पर बने संगमरमर के झरने तक पहुचांया जाता था, जहां से निकलने वाली ठंडी हवा पूरे परिसर को गर्मी में राहत पहुंचाती थी।

कैसा है ये सिस्टम

आमेर महल में 16 और 17वीं शताब्दी में बरसात का पानी इकट्टा कर पेयजल की व्यवस्था के लिए चार टांके बनाए गए थे। इनमें से दो टांकों में पानी जमा हो जाता था, जबकि महल के अंदर खास लोगों के लिए पेयजल और तापमान नियंत्रित रखने के लिए अलग से पानी पहुंचाने के इंतजाम थे।

हाल ही सभी टांके मरम्मत के लिए साफ किए गए। तब अधिकारियों ने 15 फीट चौड़े और 20 फीट गहरे टांके दिखाने की प्लानिंग की। इसके लिए टांके तक पहुंचने के लिए रास्ते तैयार किए गए हैं। महल में एक टांका दीवाने आम के पश्चिमी हिस्से में स्थित है।

इस टांके से लगते हुए भाग में भूमिगत आरामगाह है, जिसमें पत्थर से बना प्राचीन फव्वारा भी है। सर्दियों में ये हिस्सा गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है। तीसरा टांका जलेब चौक में है, जिसमें ट्यूबवेल से पानी पहुंचाकर महल में सप्लाई किया जा रहा है।





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