जयपुर. शुक्र अस्त व पंचांग का सावा नहीं होने से 7 मई को आखातीज पर लोग शादियां करने से कतरा रहे हैं। आखातीज के अबूझ सावे में शहर में सामूहिक विवाह तो होंगे, लेकिन एकल विवाह करने वालों की संख्या काफी कम रहेगी। पिछले साल के मुकाबले इस साल आखातीज पर शादियों की संख्या में 80 फीसदी तक की कमी हो सकती है।
आखातीज पर खंडेलवाल समाज, माली-सैनी समाज, बसीठा-धोबी समाज सहित कई समाजों के सामूहिक हैं, लेकिन विवाह स्थलों की बुकिंग अब तक बहुत कम है। जयपुर विवाह स्थल समिति के महामंत्री रवि जिंदल ने बताया कि पंचांग का सावा हो तो विवाह स्थलों की बुकिंग अच्छी रहती है। केवल अबूझ सावे पर विवाह स्थलों की बुकिंग पर फर्क नहीं पड़ता। फिर भी आखातीज को लेकर अभी बुकिंग आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
श्री खंडेलवाल वैश्य हितकारिणी सभा के अध्यक्ष सोहनलाल तांबी ने बताया कि आखातीज पर शुक्र अस्त के कारण उनके जोड़ों की संख्या पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। श्री धोबी-बसीठा समाज समन्वय समिति के अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद रजवानियां ने कहा कि भले ही उस दिन सावे नहीं हों, लेकिन वे अबूझ मुहूर्त के आधार पर विवाह सम्मेलन करेंगे। समाज में अबूझ सावे के प्रति किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति नहीं है।
सात सौ शादियां :
30 अप्रैल, 2006 को आखातीज पर शहर में छह समाजों के सामूहिक विवाह सम्मेलन हुए थे, जिसमें 98 जोड़ों का विवाह हुआ था। इन्हें व एकल विवाह करने वालों की संख्या को मिलाकर करीब 700 शादियां हुई थीं।
एक हजार शादियां :
19 अप्रैल 2007 को आखातीज का अच्छा सावा था। इस दिन शहर में 1000 से अधिक शादियां हुई थीं। इस दिन पांच समाजों के सामूहिक विवाह सम्मेलन में 116 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे थे।
विवाह की सार्थकता पर सवाल :
पं. बंशीधर जयपुर पंचांग के निर्माता पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि शास्त्रों में शुक्र व गुरु अस्त (तारा अस्त) के बाद मांगलिक कार्य वर्जित बताए हैं। गुरु लड़की व शुक्र लड़के के विवाह का कारक माना गया है। दोनों में से एक अस्त हो तो इसके बाद किया गया विवाह सार्थक नहीं रहता। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता नहीं रहती और संतान पक्ष के लिए भी अच्छा नहीं माना गया है।
इन अबूझ सावों पर भी शुक्र का असर
6 मई से 13 जुलाई तक शुक्र अस्त रहेगा। इस बीच 7 मई को आखातीज, 13 मई को जानकी नवमी, 19 मई को पीपल पूर्णिमा, 12 जून को गंगा दशमी, 11 जुलाई को भडल्या नवमी के अबूझ सावे हैं। आखातीज के साथ इन अबूझ सावों पर भी शादी समारोहों की कमी रहेगी।
दोष से दूर अबूझ मुहूर्त
सीताबाड़ी टोंक रोड निवासी पं. चंद्रमोहन दाधीच ने बताया कि अबूझ मुहूर्त तारे अस्त के दोष के प्रभाव में नहीं होते। अबूझ मुहूर्त पर किसी देवता का जन्म दिन माना गया है। इस दिन चंद्रमा व सूर्य ऐसी स्थिति में होते है कि गुरु या शुक्र के अस्त होने के बाद लगने वाले दोष निष्प्रभावी हो जाते हैं। इस कारण लोग सदियों से अबूझ मुहूर्त पर शादियां करते आ रहे हैं।