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आईपीएल और काउंसिल की कुश्ती

जयपुर. cricketनामी क्रिकेटरों की नीलामी से क्रिकेट के पोस्टर ब्वाय बनने को आतुर आरसीए अध्यक्ष ललित मोदी की लीग इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) उनके होम टर्फ जयपुर में ही विवादों में फंस गई है। सवाई मानसिंह स्टेडियम में आईपीएल के तहत होने वाले मैचों की जानकारी के बाद राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल ने आरसीए को पत्र लिखकर आपत्ति जताई है।

विवाद का मुख्य कारण आईपीएल का आयोजन निजी स्तर पर होना है। आरसीए और काउंसिल के बीच स्टेडियम के उपयोग को लेकर हुए एमओयू के तहत यहां किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा आयोजित मैच नहीं करवाए जा सकते। आईपीएल में नॉन स्पर्ो्िटग एक्टिविटी होंगी, जिनकी इजाजत एमओयू नहीं देता है।

18 अप्रैल से शुरू होने वाली आईपीएल के 7 मैच जयपुर में होने हैं। आरसीए ने सवाई मानसिंह स्टेडियम में आईपीएल के बोर्ड लगा दिए हैं। इस पर स्पोर्ट्स काउंसिल ने कड़ी आपत्ति करते हुए आरसीए को एक नोटिस दे दिया है। हालांकि आरसीए इसे महज एक पत्र बता रहा है।

दूसरी ओर, सरकार ने आरसीए के साथ पूर्व में हुए एमओयू की अवधि पूरी होने से पहले ही दो और एमओयू कर लिए हैं। इसके तहत आरसीए को 2012 तक स्टेडियम (क्रिकेट ग्राउंड, साउथ व नॉर्थ पैवेलियन) और 2023 तक स्टेडियम स्थित क्रिकेट अकादमी सौंप दी गई है।

आरसीए और काउंसिल के बीच हुए एमओयू की शर्र्तो में होते हुए भी क्रिकेट संघ पिछले सात महीने से न तो बिजली का बिल चुका रहा है और न ही राज्य खेल परिषद को मैच आयोजनों से हुई आय का पूरा हिस्सा दे रहा है। एमओयू में साफ लिखा है कि आरसीए अपने संसाधनों से स्टेडियम का विकास कराने के साथ ही खेलों को बढ़ावा देगी। अब स्टेडियम में हुए सभी खर्चो को दिखाकर सरकार को आमदनी का हिस्सा नहीं दिया जा रहा है।

सरकारी अफसरों की हालत यह है कि वे कागजों में तो आरसीए को पैसे जमा कराने के लिए चिट्ठी लिखते हैं, लेकिन आरसीए अध्यक्ष ललित मोदी के मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का मित्र होने के कारण कुछ कह भी नहीं पाते।

पिछले दिनों एक आईएएस अधिकारी के साथ स्टेडियम में हुए अभद्र व्यवहार के बाद तो खेल विभाग और राज्य खेल परिषद के अफसर इस मामले में चर्चा करने से भी कतरा रहे हैं। नागरिक मोर्चा के अध्यक्ष सुरेश मिश्रा ने स्टेडियम आरसीए को देने का विरोध किया है। मिश्रा ने कहा कि स्टेडियम में राष्ट्रीय कार्यक्रम भी नहीं होने दिए जा रहे है।

एक ही एमओयू के दो हिस्से किए हैं

आरसीए के डिप्टी प्रेसीडेंट डॉ. बिमल सोनी का कहना है कि पहले एमओयू में आरसीए को केवल मैदान और साउथ ब्लॉक ही दिया गया था। आरसीए ने खेल परिषद की मौखिक सहमति से ईस्ट और नार्थ ब्लॉक का भी विकास कराया। पहले एमओयू में स्टेडियम और क्रिकेट अकादमी चार साल के लिए मिले थे। बाद में बीसीसीआई की शर्त के कारण अकादमी 15 साल और स्टेडियम पांच साल के लिए मिला है। आईपीएल को लेकर हमें काउन्सिल का कोई नोटिस नहीं मिला है। काउन्सिल का एक पत्र जरूर आया है। उसमें आईपीएल के आयोजन के बारे में जो जानकारी मांगी गई है, वह दे दी गई है।

क्या दिया जवाब

आरसीए सिर्फ सहयोग कर रहा है

आरसीए ने आईपीएल के आयोजन पर कहा गया है कि आईपीएल में आने वाला पैसा बीसीसीआई में आएगा और बीसीसीआई इस राशि में से कुछ हिस्सा राज्य क्रिकेट एसोसिएशन को मिलेगा। बीसीसीआई से संबद्ध होने के कारण आरसीए फ्रेंचाइजी इर्म्िजग मीडिया को केवल सहयोग किया जाएगा।

सेवा के बदले आरसीए को पैसा देंगे : इमर्जिंग मीडिया

इमर्जिंग मीडिया के सीईओ फ्रेजर कैस्टेलिनो ने पिछले दिनों जयपुर यात्रा के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि हम मैचों के आयोजन में आरसीए की मदद लेंगे, लेकिन इसके बदले उन्हें पैसा दिया जाएगा।

क्या है एमओयू में :

>> आरसीए स्टेडियम का उपयोग केवल खेल गतिविधियों के लिए ही करेगा।
>> राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय मैचों के लिए खेल परिषद को निर्धारित फीस चुकाएगा।
>> आरसीए को मैचों से होने वाली आय में खेल परिषद को 30 फीसदी पैसा मिलेगा।
>> आरसीए अपने संसाधनों से स्टेडियम का विकास कराएगा।

बीच में ही नए एमओयू की वजह क्या?

>> इसी साल चुनाव होने वाले हैं, सरकार बदल गई तो स्टेडियम मिलना मुश्किल हो जाता
>> पहला एमओयू 30 दिसंबर, 2005 को किया, जो 31 दिसंबर, 2009 तक मान्य था
>> 8 अगस्त, 2007 को फिर 2012 तक के लिए नया एमओयू कर लिया

खेलों के विकास के लिए दिया स्टेडियम

खेल सचिव जेसी मोहंती से बातचीत

>> एसएमएस स्टेडियम में आईपीएल के आयोजन के बोर्ड लगे है, यह एमओयू का उल्लंघन है?

हमें जानकारी मिली है। हमने आरसीए को नोटिस दिया है। आरसीए के डिप्टी प्रेसीडेंट बिमल सोनी से बात भी की है। साथ ही उनसे लिखित जवाब देने के लिए कहा है। आईपीएल और आरसीए के बीच हुए समझौते की शर्र्तो की कॉपी भी मांगी है।

>> क्या नोटिस का जवाब मिल गया?

आरसीए ने मैचों के आयोजन पर प्रारंभिक जानकारी भेजी है। लेकिन हमने उन्हें विस्तृत चर्चा के लिए कहा है।

>> आरसीए का पहला एमओयू पूरा होने से पहले ही नया एमओयू क्यों ?

बीसीसीआई की शर्त थी, नहीं तो राजस्थान को खेल विकास के लिए पैसा नहीं मिलता।

>> क्या आरसीए को दो ब्लॉक विकसित करने की मौखिक स्वीकृति दी गई?

सरकार में सारे काम लिखित में होते हैं। इस मामले में क्या हुआ, मुझे पता नहीं।

>> एमओयू की अवधि पूरी होने से पहले ही नया एमओयू करने की कोई राजनीतिक वजह या दवाब तो नहीं?

किसी तरह के दबाव का सवाल ही नहीं है।

>> आरसीए न बिजली का बिल चुका रहा और न मैच आयोजनों का पैसा दे रहा है। यह शर्तो का उल्लंघन नहीं है?

हिसाब चलता रहता है। समय-समय पर खेल परिषद उन्हें पत्र लिखती रहती है। मीटिंग में बात हो जाती है।





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