इंदौर. मास्टर प्लान-2021 पर अमल के लिए निगम ने जोनल प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। यह अंजाम तक पहुंच पाएगी इसमें जानकारों को संदेह है क्योंकि इसके लिए निगम में कोई विशेष शाखा नहीं। निगम प्लानिंग एरिया में शामिल 75 गांवों की योजना कैसे बनाएगा? यह सवाल भी अनुत्तरित है।
जोनल प्लान बनाने के लिए महापौर परिषद ने जनकार्य प्रभारी ललित पोरवाल की अध्यक्षता में तकनीकी अधिकारियों की समिति बना दी है। क्या निगम पूरे प्लान एरिया के लिए जोनल प्लान बना पाएगा? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि मास्टर प्लान-1976-91 के चलते छह जोनल प्लान बने और तीन ही नोटिफाइड हो पाए। 1991 के प्लान के मुताबिक प्लानिंग यूनिट (पीयू- परिक्षेत्रीय योजना) ६-ई, पीयू 8 (ए टू ई) एवं पीयू 3-एफ का ही शासन ने नोटिफिकेशन किया था जबकि पीयू-4, 5 व 6 की योजना लौटा दी थी।
हालांकि वहां बड़े पैमाने पर निर्माण हो चुके हैं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) के अधिकारी मानते हैं जिन यूनिट में निर्माण हो चुके हैं, वहां कुछ नहीं किया जा सकता। पहले पीयू-5 शासन के पास स्वीकृति के लिए गया था तो टीएनसीपी ने कई ले-आउट मंजूर कर दिए थे। उसे उम्मीद थी स्वीकृति मिल ही जाएगी। अब इन क्षेत्रों में बसी कॉलोनियों में हजारों लोग बस गए हैं। निगम कॉलोनी सेल के पी.सी. जैन के अनुसार ऐसे स्थानों पर कॉलोनी की अनुमति नहीं दी गई है, केवल बिल्डिंग परमिशन दी है।
नियम जोनल प्लानिंग के- म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 का सेक्शन 20 के अनुसार मास्टर प्लान लागू होने के 6 महीने में जोनल प्लान बनना चाहिए। इसकी प्रक्रिया भी मास्टर प्लान जैसी ही है। सेक्शन 2(जी) के अनुसार मास्टर प्लान के डेवलपमेंट में ही जोनल प्लान शामिल है। धारा 19(5) में जारी मास्टर प्लान धारा 20 में जोनल प्लान के नोटिफिकेशन पर ही पूरा माना जाता है।
बाधाएं वैसी ही- पूर्व नगर शिल्पज्ञ नरेंद्र सुराणा मानते हैं पिछले प्लान में जोनल प्लान शासन और टीएनसीपी को बनाना थे। बाद में यह जवाबदारी निगम को सौंप दी। निगम के पास न तब तकनीकी रूप से प्रशिक्षित स्टाफ था, न अब है। जोनल प्लान मास्टर प्लान का ही छोटा रूप है। उसे बनाने में एक्सपर्ट और रिमोट सेसिंग की मदद ली गई तो इसमें भी वही प्रक्रिया अपनाना चाहिए।
बाहर के प्लान कौन बनाएगा- इंजीनियर सी.एस. डंगावकर ने बताया निगम अपनी सीमा में तो प्लानिंग कर लेगी लेकिन प्लान में जुड़े 75 गांव के अधिकार उसे नहीं। इसके लिए शासन मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी बनाए या कंसल्टेंट नियुक्त करे।
निगम का दावा- जोनल प्लान समिति के अध्यक्ष ललित पोरवाल ने कहा अधिकारियों से चर्चा करेंगे। कहां सड़कें चौड़ी की जा सकती हैं। किन सड़कों को मुख्य सड़कों से लिंक किया जा सकता है। जरूरत हुई तो बुद्धिजीवियों की सलाह भी लेंगे।