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औलख के रिसॉर्ट पर मेहरबान क्यों

चंडीगढ़. पंजाब के पूर्व डीजीपी सर्वदीप सिंह विर्क के भाई कर्नल आरडीएस विर्क ने पंजाब सरकार पर चिमनी हाइट्स रिसॉर्ट के सीएलयू लाइसेंस के मुद्दे पर भेदभाव का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, सरकार ने वर्तमान डीजीपी एनपीएस औलख के वसीला रिसॉर्ट को बगैर औपचारिकताएं पूरी किए सीएलयू लाइसेंस दिया है जबकि औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद चिमनी हाइट्स की लाइसेंस कैंसिल करने संबंधी नोटिस जारी कर दिया गया।

विर्क ने सोमवार को इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनकी दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस विजेंद्र कुमार जैन और जस्टिस जसवंत सिंह की बेंच ने नवंबर 2007 में ग्रेटर मोहाली एरिया डवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) के उन आदेशों पर रोक लगाई जिसमें उसने चिमनी हाइट्स के चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) के लाइसेंस को कैंसिल करने का नोटिस जारी किया था। नोटिस में गमाडा ने विर्क को सीएलयू लाइसेंस के लिए 8686125 रु. अदा करने का नोटिस जारी किया था।

हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर पंजाब सरकार और गमाडा को 30 जुलाई को मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

जीरकपुर के पास स्थित रिसॉर्ट ‘चिमनी हाइट्स’ पंजाब के पूर्व डीजीपी एसएस विर्क और उनके भाई कर्नल आरडीएस विर्क का है।

क्या कहना हैं कर्नल विर्क का :

चिमनी हाइट्स समेत एरिया में 29 रिसॉर्ट हैं। इनमें से सीएलयू केवल चिमनी हाइट्स और डीजीपी एनपीएस औलख के ‘वसीला’ के पास ही सीएलयू लाइसेंस है। कर्नल विर्क का कहना है कि इन सभी रिसॉर्ट में केवल चिमनी हाइट्स ने सभी चार्ज जमा कराए हैं और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट से एनओसी भी ले रखी है। उन्होंने बिल्डिंग प्लॉन भी पास करवाया हुआ है। वसीला ने गमाडा को किसी प्रकार की सीएलयू चार्ज जमा नहीं कराए हैं। लेकिन गमाडा ने उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया।

-पंजाब सरकार का मेरे भाई एसएस विर्क के प्रति नकारात्मक रवैया है। इसलिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए निशाना बना रही है। उनके रिसॉर्ट को नोटिस जारी करना इसी का एक हिस्सा है।





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