नई दिल्ली देश की जनता से कर के रूप में वसूले जा रहे करोड़ों रुपए राजनेताओं के आवासों के रख-रखाव पर खर्च हो रहे हैं। विगत तीन वर्र्षो में देश के प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्रियों तथा कुछ चुनिंदा वीआईपी शख्सियतों के आवासों पर तकरीबन 3.50 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
डीएनए-भास्कर द्वारा की गई छानबीन में पता लगा कि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने वर्ष 2006-07 में करीब साढ़े 45 लाख रुपए अकेले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सात रेस कोर्स रोड स्थित शानदार आवास में हुए सिविल कार्र्यो पर खर्च किए हैं। इसी आवास पर वर्ष 2004 05व वर्ष2 006-07 ७ के मध्य हुए कुल सिविल कार्र्यो का खर्च 1.5 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। .
इसी अवधि में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आवास पर हुए सिविल कार्र्यो पर तकरीबन ४4 लाख रुपए खर्च किए गए।
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के १क् जनपथ स्थित आवास, उनकी पुत्री प्रियंका गांधी के 35 लोधी रोड स्थित आवास व पुत्र राहुल गांधी के 12 टेलीग्राफ लेन स्थित आवास पर इन तीन वर्र्षो में तकरीबन ४७ लाख रुपए खर्च किए गए। वर्ष 2006-07 में सोनिया गांधी के आवास पर 2.80लाख रुपए सालाना केवल बागवानी पर खर्च किए गए। सीपीडब्ल्यूडी अपने माली को औसतन १.५ लाख रुपए सालाना वेतन के रूप में देता है।
सीपीडब्ल्यूडी की दलील : सीपीडब्ल्यूडी का कहना है कि इन बंगलों की मियाद पूरी हो चुकी है, इसलिए इन पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है। कानून के मुताबिक इस जोन में बने मकानों में कोई फेरबदल नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इन्हें हैरिटेज बिल्डिंग का दर्जा प्राप्त है।
सुरक्षा इंतजामों पर भी भारी खर्च वर्ष 2006-07 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित चुनिंदा वीआईपी शख्सियतों की सुरक्षा के लिए स्पेशल प्रोटेक्शन फोर्स (एसपीजी) का कुल खर्च 154.32 करोड़ रुपए रहा।
कम हो सकता है व्यय नई दिल्ली स्थित देश के सबसे महंगे इलाके में बने सभी आवासों पर 330 करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्च होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई एकड़ पर बने इन बंगलों की जगह सस्ते व आधुनिक शैली के आवास बनाए जा सकते हैं। आर्किटैक्ट हफीज कांट्रैक्टर कहते हैं कि सरकार इनकी जगह बहुमंजिला भवन बना सकती है। इससे रख-रखाव पर खर्च कम आएगा।