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9 साल में न्याय : शर्मा शिवानी का कातिल करार

नई दिल्ली. नौ साल पुराने शिवानी हत्याकांड में कड़कड़डुमा अदालत ने आज फैसला सुनाते हुए पूर्व आईपीएस अफसर आर के शर्मा और तीन अन्य को दोषी करार दे दिया है।

23 जनवरी 1999 में पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या के मामले में नौ साल बाद अदालत ने फैसला सुनाते हुए आला पुलिस अफसर आर के शर्मा को दोषी करार देते हुए तीन अन्य आरोपियों प्रदीप शर्मा, सत्यप्रकाश और भगवान को दोषी करार दिया ओर दो आरोपियों वेदप्रकाश और कालू को बरी कर दिया। अदालत ने धारा 120 बी और 302 के अंतर्गत आरोपियों को दोषी करार दिया है।

दोषियों को सजा 20 मार्च को सुनाई जाएगी। इस दिन सजा के बारे में दोनों पक्षों के वकील बहस करेंगे। बहस के बाद अदालत सजा सुनाएगी। आज अदालत ने माना कि शिवानी की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम दिए जाने के पीछे आर के शर्मा की मुख्य भूमिका थी।

आरके शर्मा के वकील ने कहा है कि वे अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। गौरतलब है कि इस मामले में नौ साल सुनवाई चली है और इतने लंबे समय में 200 से ज्यादा गवाह अदालत में पेश किए गए और बड़ी संख्या में गवाहों ने बयान भी बदले।

हत्या का सच :
हरियाणा के पूर्व आईजी शर्मा प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात थे और उनके शिवानी से संपर्क थे। जानकारी के मुताबिक दिल्ली के नवकुंज अपार्टमेंट स्थित फ्लैट में शिवानी रहती थी। पत्रकार शिवानी के हाथ आरके शर्मा से जुड़े कुछ ऐसे कागजात हाथ लगे थे जिनके खुलासे से शर्मा को काफी नुकसान हो सकता था। शर्मा ने अपने सहयोगी प्रदीप शर्मा के साथ शिवानी के कत्ल की साजिश रची और 23 जनवरी 1999 को प्रदीप शिवानी के फ्लैट पर पहुंचा और उसने चाकुओं से गोदकर शिवानी का कत्ल कर दिया।

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