गुड़गांव.
काले हिरण के शिकार के मामले में पूर्व क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी के साथ उनकी बेटी अभिनेत्री सोहा भी जांच के घेरे में आ गई हैं। कथित शिकार में इस्तेमाल की गई बंदूक का लाइसेंस सोहा के नाम था और घटना के चार माह बाद उसका नवीनीकरण भी करवा लिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक पटौदी का शिकार मामला फरीदाबाद अदालत में विचाराधीन है, इसलिए लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए था। कानूनन 21 साल की उम्र वाले को ही हथियार लाइसेंस जारी किया जाता है जबकि सोहा को 18 साल व कुछ माह की उम्र में ही लाइसैंस दे दिया गया था। लाइसेंस संबंधी फाइल भी उपायुक्त ऑफिस से गायब है।
उपायुक्त राकेश गुप्ता ने पीपुल फॉर एनिमल के चेयरमैन नरेंद्र कादयान द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने से उजागर हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने पटौदी व सोहा को कारण बताओ नोटिस भेजकर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
एसएसपी झज्जर से भी रिपोर्ट मांगी गई है।
पासपोर्ट ने खोला राज :
गुप्ता ने बताया कि पासपोर्ट के अनुसार सोहा का जन्म 4 अक्तूबर 1978 का है और 1996 में उसे लाइसैंस जारी किया गया था। तब देवेंद्रसिंह गुड़गांव के उपायुक्त थे। सोहा की राइफल के रिटेनर उसके पिता पटौदी ने वर्ष 2003 में इसी राइफल से कथित तौर पर हरियाणा के झज्जर में काले हिरण का शिकार किया था। राइफल पुलिस कस्टडी में होने के बावजूद गुड़गांव एसडीएम ऑफिस ने 2005 में इसके लाइसैंस का नवीनीकरण कर दिया था।
शस्त्र अधिनियम के तहत मामला : गुप्ता के मुताबिक रिटेनर होने के नाते पटौदी राइफल का इस्तेमाल तो कर सकते थे, लेकिन गलत तरीके से लाइसैंस लेने के कारण उनके व सोहा केखिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत मामला बनता है।