जयपुर. कृषि विभाग में फव्वारा सिंचाई योजना के अनुदान वितरण में 10 लाख रुपए से ज्यादा का घोटाला सामने आया है। इस मामले में फर्जी खाते खुलवाकर किसानों के नाम से फव्वारा अनुदान राशि हड़पने के मामले में विभाग के उप निदेशक व डीलर सहित पांच लोगों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया गया है। आरोपी कृषि उप निदेशक को निलंबित करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अलावा इस मामले की विभागीय जांच भी चल रही है।
विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वर्ष 2006-07 में बाड़मेर जिले में फव्वारा सिंचाई संयंत्र योजना के अनुदान वितरण में तत्कालीन कृषि उप निदेशक रघुनाथदेव आढ़ा ने भीयाडू के डीलर हनुमान चौधरी, डाक जमादार गजेंद्रसिंह व कपूरचंद जैन और लक्ष्मीनारायण राठी के सहयोग से सरकारी राशि का घोटाला किया। कृषि आयुक्त मनोज शर्मा के निर्देश पर बाड़मेर के कृषि उप निदेशक संतोष कुमार महावर की ओर से हाल ही वहां कोतवाली में तत्कालीन उप निदेशक सहित पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार इन आरोपियों ने बाड़मेर जिले के बाढ़ग्रस्त इलाकों में रहने वाले 39 किसानों के नाम से फर्जी खाते खुलवाकर राज्य सरकार से फव्वारा संयंत्रों के लिए मिलने वाली अनुदान राशि के चेक का भुगतान स्वयं उठा लिया। इन खातों के जरिए आरोपियों ने 10 लाख 13 हजार 350 रुपए का गबन किया।
इसके अलावा आठ अन्य किसानों की फव्वारा अनुदान पत्रावलियों में फर्जी दस्तखतों व अन्य दस्तावेजों से एक लाख 24 हजार 450 रुपए की राशि का गबन किया। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2006-07 में तत्कालीन उप निदेशक ने 67 किसानों को फव्वारा अनुदान राशि के चेक मुख्यमंत्री के हाथों किसानों को वितरित कराए थे। बाद में मामला उजागर होने पर जब भौतिक सत्यापन किया गया तो इनमें से 65 किसानों के पास फव्वारा सेट नहीं पाए गए।
फव्वारा अनुदान घोटाले की जांच चल रही है। संबंधित लोगों के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तत्कालीन उप निदेशक को निलंबित करने की कार्रवाई की जा रही है।
—प्रभुलाल सैनी, कृषि मंत्री