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सूखा राहत पर विपक्ष का वाकआउट

भोपाल. पाला और सूखा पीड़ित किसानों को राहत और मुआवजा देने के मामले को लेकर मंगलवार को विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। हालांकि राजस्व मंत्री कमल पटेल ने बताया कि सूखे के लिए पैसे की कमी नहीं है।

कांग्रेस सदस्य सज्जन ¨सह वर्मा, डा. गो¨वद ¨सह और आरिफ अकील की ओर से पेश ध्यानाकर्षण सूचना पर विपक्षी सदस्यों ने अनेक स्थानों पर मुआवजा वितरण में सर्वे का काम पूरा न होने तथा भेदभाव का आरोप भी लगाया। श्री पटेल ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सदस्यों को भरोसा दिलाया कि १५ दिनों में सर्वे पूरा कर मुआवजा वितरण भी करा लिया जाएगा।

इससे पूर्व श्री अकील ने सत्ताधारी दल के सदस्यों की टोकाटाकी के बीच राजस्व मंत्री से जानना चाहा कि प्राकृतिक आपदा से निपटने केंद्र से कितनी सहायता मिली है और खुद राज्य सरकार ने कितनी राशि खर्च की है। श्री पटेल ने कहा कि राज्य के ३९ जिलों की १६४ तहसीलें सूखा प्रभावित घोषित की गई हैं। राज्य सरकार के पास प्राकृतिक आपदा निधि में पर्याप्त धनराशि है।

वित्त वर्ष २00७-0८ के लिए आपदा राहत निधि २६९.२९ करोड़ रुपए नियत हैं। इसमें केंद्र का अंश २क्१.९७ करोड़ तथा राज्य का ६७.३२ करोड़ रुपए है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सूखा राहत कार्यो के लिए आपदा राहत निधि के अतिरिक्त ६७ करोड़ रुपए का प्रावधान विभागीय मद में किया है। तृतीय अनुपूरक अनुमान में भी १४क् करोड़ रुपए की राशि सूखा राहत के लिए रखी गई है।

राजस्व मंत्री ने कहा कि सदस्यों की ओर से जिन जिलों में सूखा या पाला पीड़ित किसानों के सर्वे का काम पूरा नहीं होने की जानकारी मिली है, वहां १५ दिन में मुआवजा बांट दिया जाएगा व मुआवजा वितरण की खामियों को भी जल्द दूर किया जाएगा।

इससे पूर्व कांग्रेस के सज्जन ¨सह वर्मा और कुछ अन्य सदस्यों ने मुआवजा वितरण के काम में भेदभाव का आरोप लगाया। वंशमणि वर्मा ने कहा कि उनके क्षेत्र में राहत कार्य अभी तक शुरू नहीं हुए है। बाद में मंत्री के उत्तर को असंतोषजनक बताते हुए विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

गाडरवारा कांड : विपक्ष ने किया हंगामा

विधानसभा संवाददाता. भोपाल नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा कस्बे में पांच लोगों की हत्या को लेकर मंगलवार को विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष इस मामले पर सदन की कार्रवाई रोक चर्चा कराना चाहता था, जिसे स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी द्वारा नामंजूर किए जाने से खफा होकर उसने वाकआउट कर दिया। यह मामला सदन में दो बार गूंजा। सुबह विधानसभा की कार्रवाई शुरू होते ही विपक्ष के अनेक सदस्यों ने गाडरवारा कांड का जिक्र करते हुए विरोध कर रहे नागरिकों पर पुलिस द्वारा ढाए गए कहर की जानकारी दी। प्रश्नकाल समाप्त होते ही नेता प्रतिपक्ष जमुना देवी समेत कांग्रेस विधायक सत्यदेव कटारे, सज्जन वर्मा, हुकुम सिंह कराड़ा, आरिफ अकील, गोविंद सिंह, इंद्रजीत कुमार, प्रेमचंद गुड्डू, तुलसी सिलावट आदि ने एक बार फिर गाडरवारा का मामला उठाया और अध्यक्ष से तत्काल चर्चा की मांग की।

कांग्रेस विधायकों का आरोप था कि प्रशासन ने अघोषित कफ्र्यू लागू कर दिया है और लोगों को परेशान किया जा रहा है। अध्यक्ष द्वारा सुबह दी गई व्यवस्था दोहराए जाने से नाराज विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया। इससे पूर्व जमुना देवी ने उज्जैन के प्रो. सभरवाल हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मंगलवार से उनके पुत्र हिमांशु सभरवाल द्वारा भोपाल में शुरू किए गए आमरण अनशन का मामला उठाते हुए उनकी मांग का समर्थन किया।





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