इंदौर. मेरा शुरू से ही लक्ष्य डिप्टी कलेक्टर बनना था। सफलता में मेरे पति रामजी अवस्थी व पुत्र अनन्य का विशेष योगदान रहा। ये दोनों मेरी पढ़ाई में मदद करते थे। यह कहना है पीएससी परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए चुनी गई इंदौर की माया अवस्थी का। उन्होंने कहा मैंने तीन मर्तबा पीएससी की परीक्षा दी और तीनों ही बार मेरा चयन भी हुआ।
वर्ष 1999 में मैं नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुई और फिलहाल बेटमा में अतिरिक्त तहसीलदार हूं। पिछली परीक्षा में भी मेरा चयन हुआ था जिसमें मैंने डिप्टी कलेक्टर के पद के लिए ही आवेदन किया था। श्रीमती अवस्थी का कहना है मैं दिन में नौकरी करती थी और रात को पढ़ाई करती थी। इंटरव्यू बोर्ड की मनोवैज्ञानिक तरीके से साक्षात्कार लेने की नई प्रणाली अच्छी लगी। मेरे पिता आर.पी. उपाध्याय भी दो वर्ष पूर्व अपर कलेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए जिनकी मुझे काफी मदद भी मिली। पति एअरपोर्ट अथॉरिटी में इंजीनियरिंग मैनेजर हैं।
आईएएस अफसर बनने की इच्छा -संदीप
हाई रिस्क, हाई गैन। ये ही मेरा सिध्दांत है। यह कहना है संदीप कुमार सोनी का जो पीएससी परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर पद के लिए चुने गए है। संदीप ने टॉपर लिस्ट में सातवां स्थान पाया है। वे कहते हैं यह उनका पहला प्रयास था। मूलत: हरदा के रहने वाले संदीप पिछले १क्-१२ सालों से इंदौर में भाई के साथ इंस्टिटच्यूट संभाल रहे है। वे बताते हैं एसजीएसआईटीएस कॉलेज से इंजीनियरिंग करने के बाद भी इच्छा थी कि आईएएस अफसर बनूं। बीच में एमपीपीएससी परीक्षा आ गई तो मैं सम्मलित हो गया। सही दिशा में मेहनत करें तो परीक्षा कठिन नहीं है।