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जमीन पर करोड़ों के सौदे

रायपुर. रायपुर का जिला रजिस्ट्री दफ्तर 1984 से पुराने र्ढे पर चल रहा है। जिस वक्त कार्यालय स्थापित हुआ, तब की जरूरत के हिसाब से सहूलियतें मुहैया कराई गई थीं। अब रजिस्ट्री दफ्तर में जाने वाले भी कई गुना बढ़ गए हैं तथा राजस्व भी। इसके बावजूद सुविधाएं उतनी ही हैं। विभाग की राजस्व आय आठ से दस गुना बढ़ गई है, फिर भी लोग भटकने पर विवश हैं। बैठने तो दूर, दफ्तर में पीने के पानी का भी इंतजाम नहीं है।

दैनिक भास्कर टीम ने मंगलवार को कलेक्टोरेट स्थित जिला पंजीयक कार्यालय में तीन घंटे बिताए। इस दौरान लाखों की रजिस्ट्री कराने आने वाले लोगों की समस्याएं जानने की कोशिश की गई। तहसील कार्यालय से लेकर पंजीयक तक लोगों को इंतजार करना पड़ता है। दस्तावेज लेखक तहसील कार्यालय में बैठते हैं। वहां ग्राहक जाकर स्टांप खरीदते हैं और दस्तावेज लिखवाते हैं।

इसके बाद ग्राहक को कलेक्टोरेट परिसर आना पड़ता है। ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। दो-तीन घंटे बाद उनका नंबर आता है। मार्च की वजह से रजिस्ट्री दफ्तर में काफी भीड़ है। अभी रोजाना 100 से ज्यादा रजिस्ट्री हो रही है।एक रजिस्ट्री के लिए दोनों पक्षों के पांच से सात लोगों को आना पड़ता है। लेकिन पंजीयक कार्यालय में बैठने के लिए कंक्रीट से बने दो बेंच है। 8-10 ग्राहक ही वहां बैठ पाते हैं। बाकी लोगों को परिसर के बाहर घंटों खड़े रहना पड़ता है। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब रजिस्ट्री में महिला या बुजुर्ग का नाम हो। उनके लिए कोई इंतजाम नहीं है।

निगम नहीं दे रहा नल

अधिकारियों का कहना है कि नल कनेक्शन के लिए कई बार नगर निगम को पत्र लिखा गया। लेकिन कनेक्शन नहीं लगाया जा रहा है। कार्यालय में एक बोर है, उसमें पानी नहीं है। ग्राहकों को पानी पीने के लिए होटल जाना पड़ता है। दस्तावेज लेखक मार्च के अंतिम दिनों में भीड़ को देखते हुए पंडाल लगाते हैं। वे पानी का इंतजाम भी करते हैं।

टार्गेट के लिए जद्दोजहद

पिछले साल जिले में 64297 रजिस्ट्री हुई। इससे 164 करोड़ की आय हुई। इस साल 203 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है। लेकिन मार्च महीना आधा बीतने के बाद भी पिछले साल जितना कलेक्शन नहीं हुआ है। इसकी वजह पटवारियों की हड़ताल को माना जा रहा है। जिला पंजीयक मदन कोर्पे का कहना है कि होली की वजह से रजिस्ट्री कम हो रही है। लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद नहीं दिख रही।





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