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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन के डिनर का बहिष्कार करने वाले कांग्रेस विधायकों से खासे नाराज हैं। इस कदर नाराज हैं कि उन्होंने राज्यपाल से फोन पर बात कर पूरी घटना के लिए खेद जता दिया। इसके साथ ही कांग्रेस विधायकों की भोज की राजनीति में उबाल आ गया है।
श्री जोगी ने बाकायदा प्रेस को बयान जारी कर विधायकों के इस कदम को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि बहिष्कार दुखद है। राज्यपाल का पद संवैधानिक होता है और किसी भी कारण से कभी कोई ऐसी बात नहीं की जानी चाहिए जिससे संवैधानिक पद की गरिमा के प्रतिकूल आचरण हो। उन्होंने कहा कि विधायकों ने जब बहिष्कार का निर्णय लिया तब वे नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण के लिए गए थे, इस कारण विधायकों से उनका संपर्क नहीं हो पाया। अन्यथा वे कांग्रेस विधायकों को ऐसा कोई कदम उठाने की सलाह नहीं देते।
अगर उनकी बात हो जाती तो संभवत: यह दुखद घटना नहीं हो पाती। उल्लेखनीय है कि 34 कांग्रेस विधायकों में से ज्यादातर जोगी समर्थक माने जाते हैं। दावा किया जाता है कि करीब 30 विधायक उनके साथ हैं। ऐसे में श्री जोगी के बयान को प्रदेश कांग्रेस की गुटीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और उपनेता भूपेश बघेल संगठन खेमे के हैं। कहा जाता है कि राजभवन के भोज का बहिष्कार करने का निर्णय श्री कर्मा और श्री बघेल के नेतृत्व में लिया गया। विधायकों ने इस निर्णय का पालन तो किया लेकिन उसके बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति फिर सतह पर आ गई। श्री जोगी विधायकों के कदम से नाराज हो गए। उन्होंने विधायकों के इस कदम की सार्वजनिक तौर पर निंदा कर अपनी भावना से भी अवगत करा दिया।
महंत ने चुप्पी साधी : इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत ने चुप्पी साध ली है। पूरे मामले में उन्होंने किसी प्रकार की कोई बात कहने से इनकार कर दिया। पर कांग्रेस के सूत्रों का दावा है कि श्री महंत इस विवाद को समाप्त करना चाहते थे। कहा जा रहा है कि कल उन्होंने कांग्रेस विधायक दल को बहिष्कार के निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए कहा था। पर बाद में विधायकों ने जब डिनर पर जाने का फैसला सुना ही दिया तो उन्होंने उनका साथ देने का फैसला किया।
वोरा, महंत आज लेंगे बैठक : बैठक में जिला अध्यक्षों, पूर्व विधायकों, मोर्चा व प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रमुखों को आमंत्रित किया गया है। विधायकों की उपस्थिति जरूरी नहीं है। 15 मार्च को दिल्ली की बैठक में मिले निर्देशों से पदाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। बैठक में राज्यसभा सदस्य मोतीलाल वोरा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत व नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा विशेष तौर पर मौजूद रहेंगे।