जयपुर. विपक्ष के सुझावों व आरोपों की अनदेखी करते हुए राज्य सरकार ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में पांच निजी विश्वविद्यालयों व राजस्थान सह-चिकित्सा परिषद विधेयक को पारित कर दिया। इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्यों ने विश्वविद्यालयों के नाम पर धन्ना सेठों को सस्ती दरों पर जमीन देने का आरोप लगाया।
राज्य विधानसभा में छह विधेयकों पर चर्चा के बाद जयपुर में जयपुर नेशनल विश्वविद्यालय विधेयक, एमिटी विश्वविद्यालय राजस्थान विधेयक, निम्स विश्वविद्यालय जयपुर विधेयक 2008, पचेरी बड़ी (झुंझुनू) में सिंघानिया विश्वविद्यालय व उदयपुर में सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय विधेयक 2008 संशोधित रूप से पारित किया गया।
इसके साथ ही नीम हकीमों पर लगाम कसने के लिए राजस्थान सह-चिकित्सा परिषद विधेयक 2008 पारित किया गया।
जमीनों की लूट-खसोट का आरोप :
कांग्रेस के संयम लोढ़ा ने कहा, निजी विश्वविद्यालय जमीनों की लूट-खसोट का जरिया हैं। फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने सस्ती दरों पर जमीनें आबंटित की है।
उन्होंने कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय के अशोक चौहान के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर वारंट जारी कर रखा है। कांग्रेस के बी. डी. कल्ला ने कहा, निजी विश्वविद्यालयों पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं होगा। वाइस चांसलर और चांसलर की नियुक्ति का अधिकार भी सेठों को मिल जाएगा।
इन पदों के लिए कोई योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। हिंडौली के हरिमोहन शर्मा ने कहा कि प्रबंध मंडल में सेठों के प्रतिनिधियों के सदस्यों की संख्या अधिक होने से मनमर्जी से निर्णय किए जाएंगे। रामनारायण मीणा ने कहा कि ये विधेयक गरीब विरोधी व भ्रष्टाचार को बढ़ाने वाला है। इनके खिलाफ पहले से मुकदमें दर्ज हैं। निर्दलीय हेमराज मीणा ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के पांच विधेयकों में एकरूपता नहीं है।
सत्तापक्ष ने भी गिनाई कमियां
भाजपा के राव राजेंद्रसिंह ने कहा कि राजस्थान के सर्वाधिक युवा सेना में होने के बावजूद किसी भी विश्वविद्यालय ने मिल्रिटी साइंस जैसे विषय को शामिल नहीं किया है। आईटी और नैनो टैक्नोलोजी से संबंधित पाठ्यक्रमों को भी प्राथमिकता नहीं दी गई है।
शिक्षामंत्री कालीचरण सराफ का जवाब
-अधिनियम में नियमों का उल्लंघन करने और कुप्रबंधन होने पर 45 दिन में नोटिस देने और जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर परिसमापन का आदेश पारित करने का सरकार को अधिकार है।
-इन विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आरक्षण की समुचित व्यवस्था होगी। नौकरियों में प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की व्यवस्था नहीं होने से यह प्रावधान शामिल नहीं किया गया है।
-इन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए नियामक मंडल गठित करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
-एमिटी विश्वविद्यालय से अशोक चौहान का कोई लेना-देना नहीं है, वह उनके पुत्र के नाम पर है।
- शैक्षिक उद्देश्य से सस्ती दरों पर दी जमीन पर शैक्षिक गतिविधियां नहीं होती है तो जमीन सरकार लेगी।
-वाइस चांसलर और चांसलर की नियुक्ति बिना सरकार की अनुमति के नहीं हो सकेगी।
विपक्ष के सुझाव जो अस्वीकार हो गए
-प्रबंध मंडल में विधायकों को सदस्य बनाया जाए।
-राज्य सरकार के एक की बजाय दो सदस्य मनोनीत किए जाएं।
-सीनेट का गठन किया जाए।
-निजी विश्वविद्यालयों में चांसलर राज्यपाल या उतने ही केडर के व्यक्ति को बनाया जाए।
राजस्थान सह-चिकित्सा परिषद विधेयक पर विपक्ष का नजरिया
-इस विधेयक को एक माह के लिए जनमत जानने के लिए परिचालित किया जाए।
-गांवों में पैरामेडिकल स्टाफ नहीं है तो इस विधेयक का क्या मतलब है?
-परिषद में निर्वाचित सदस्यों से मनोनीत सदस्यों की संख्या अधिक है।
-परिषद का सरकारीकरण किया जा रहा है।
-अपील का अधिकार भी सरकार ने अपने पास रखा है।
चिकित्सा मंत्री नरपतसिंह राजवी का जवाब
-नीम हकीमों व अप्रशिक्षित लोगों पर नियंत्रण के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है।
-कुल 17 में से 9 सदस्य निर्वाचित होंगे।
-पैरामेडिकल कोर्सेस करने वालों को प्रेक्टिस के लिए मान्यता मिल जाएगी।
-पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट को भी मान्यता मिल सकेगी।
-राज्य सरकार ने पैरामेडिकल स्टाफ की सबसे ज्यादा भर्ती की है जो पहले कभी नहीं हुई।