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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़भले ही आप कितने ही कामयाब-काबिल खिलाड़ी क्यों न हों, विदेशी धरती पर झंडे गाड़कर देश के साथ ही अपने प्रदेश का नाम रोशन क्यों न किया हो, आपको देश के सवोच्च खेल पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका हो लेकिन अगर आप क्रिकेट के नहीं तो हरियाणा सरकार के काम के भी नहीं। और अगर आपने किक्रेट का एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला है तो सरकारी नजर में सम्मान के काबिल हैं।
गैर-क्रिकेट खेलों के प्रति पक्षपाती रवैया जनता का नहीं, सरकारों का भी है। खुद हरियाणा सरकार की हाईकोर्ट में दी गई दलीलें यही साबित करती हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह के गृह जिले रोहतक के क्रिकेटर जोगिंद्र सिंह को स्पोर्ट्स कोटे से सीधे डीएसपी बनाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
सरकार ने इस फैसले का आधार जोगिंद्र शर्मा द्वारा 20-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप में इंडिया की तरफ से विनिंग विकेट लेना बताया है। यह भी कहा गया है कि जोगिंद्र ने क्रिकेट के कई प्रतिष्ठित टूर्नामेंट्स में भी हिस्सा लिया है। फैसले को चुनौती देने वाले बॉक्सर की दलील है कि जोगिंद्र ने ज्यादातर घरेलू क्रिकेट ही खेला है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उसकी कोई खास ख्याति नहीं है।
जबकि कॉमनवैल्थ जैसी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में दो-दो, तीन-तीन बार गोल्ड मैडल जीते चुके और ओलंपिक में इंडिया को रिप्रेजेंट कर चुके खिलाड़ियों को सरकार ने पुलिस में कांस्टेबल के लायक भी नहीं समझा।
जोगिंद्र शर्मा और महिला हॉकी टीम की कैप्टन ममता खरब को डीएसपी बनाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने जोगिंद्र शर्मा और ममता खरब को नए सिरे से नोटिस जारी कर 17 जुलाई को अपना पक्ष रखने को कहा है।
जोगिंद्र शर्मा के लिए रूल में दी ढील
सरकार ने अपने एफिडेविट में माना है कि जोगिंद्र को डीएसपी पद पर भर्ती करने के लिए कैबिनेट में फैसला लेकर हरियाणा पुलिस सर्विस रूल 2002 के रूल 18 में ढील दी गई। सरकार की दलील है कि उसने जोगिंद्र शर्मा को इसलिए डीएसपी बनाया ताकि राज्य के युवा खेल क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और इसके लिए डीजीपी ने पत्र भी लिखा था।