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मां-बेटे में कानून की दीवार

चंडीगढ़28 साल से बिछड़े बेटे की रिहाई की कोशिश में पहले उसकी सारी जमीन बिक गई और अब वह अपने गहने भी बेच आई है। इसके बावजूद बेटे से मिलना तो दूर सरकार ने उसे बेटे की एक झलक पाने से भी रोक दिया है। यह दास्तां 75 साल की एक हिंदुस्तानी मां की है। बिछड़ने के बाद पाकिस्तानी बन चुके और अब अमृतसर की जेल में बंद बेटे अहमद और उसकी मां अमीना बाई के बीच कानूनी अड़चनें ही दीवार बन गई हैं। बेटा मां से मिलने हिंदुस्तान आया तो बेवा मां से मिलने के बजाय सीधा जेल पहुंच गया। अब अमीना बाई ने अपने बिछुड़े बेटे से मिलने के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली है। मां की फरियाद पर बुधवार को सुनवाई होनी है।

अमृतसर जेल प्रशासन बना दीवार :

अमीना बेटे अहमद से मिलने गुजरात से 12 मार्च 2008 को अमृतसर पहुंची, परंतु अमृतसर जेल प्रशासन ने अहमद और उसकी पत्नी के पाक नागरिक होने के चलते अमीना की मुलाकात नहीं होने दी। अगस्त 2007 में पहली बार अपने बेटे के अमृतसर जेल में बंद होने की सूचना मिलने पर अमीना गुजरात से पंजाब आई थी और उसने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी, जो अभी तक पैंडिग है।

क्या है मामला : गुजरात के कच्छ इलाके में रहने वाली अमीना बाई का बेटा अहमद 1979 में गलती से कच्छ सीमा से भटक कर पाक चला गया था।

इसके बाद अहमद ने पाक नागरिकता हासिल कर ली और कराची की सीमा से शादी कर ली थी। इधर, अमीना बाई पति सादिक के साथ रहती थी। कुछ समय बाद अमीना विधवा हो गई। उसकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो गई। अब वह गुजरात सरकार से बीपीएल पेंशन पाती है। जब पाक में अहमद को अपनी मां की हालत के बारे में पता चला तो वह पत्नी के साथ भारत आ गया। जहां अटारी में उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। दिसंबर 2006 में अहमद और सीमा को 1 साल की सजा सुनाई गई। दिसंबर 2007 तक दोनों की सजा पूरी हो चुकी है।

पाकिस्तान नागरिक होने के कारण जेल प्रशासन दोनों को जेल में अलग अलग रखे हुए है और उन्हें किसी से मिलने की इजाजत भी नहीं है।





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