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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर.
बिन पिचकारी कैसी होली, बच्चों और किशोरों का होली का हुड़दंग इसके बगैर अधूरा सा ही लगता है। इस समय बाजार में चाइना मेड पिचकारियों की धूम मची हुई है। 1800 रुपए तक की पिचकारी बाजार में आई है और बच्चे इसे लेने की जिद भी खूब कर रहे हैं। दुकानदारों का भी कहना है कि जब से चाइना मेड पिचकारियां बाजार में आई हैं तब से देशी पिचकारियों की ओर कोई देखता भी नहीं है।
इन दिनों टोपी बाजार, महाराज बाड़ा, सुभाष मार्केट, थाटीपुर और मुरार में सजी पिचकारियों की दुकान पर इनके करीब पांच सौ आकषर्क मॉडल मौजूद हैं। खास बात यह है कि चाइनीज आयटमों ने जिस प्रकार हर क्षेत्र में देशी उत्पादों के बीच सेंध लगाई है उसके असर से पिचकारी बाजार भी अछूता नहीं रहा। इस बाजार पर कमोबेश शत प्रतिशत चाइनीज पिचकारियों ने कब्जा जमाया है।
चाइनीज पिचकारियां अपने आकर्षक डिजाइन और रंग से सबका ध्यान अपनी ओर आकषिर्त कर रही हैं। प्रेशर पिचकारी में सू सू करता हुआ लड़का बच्चों का विशेष पंसदीदा आइटम बना हुआ है। इसके अलावा कैमरामैन, म्यूजिकल गन पिचकारी, कोल्ड ड्रिंक्स के टिन व बड़े आकार की टैंक पिचकारी भी बच्चों द्वारा खूब पसंद की जा रही हैं।
इनके अलावा विभिन्न प्रकार के कैप, दाढ़ी, मूंछ और चेहरा आदि सामान भी इन दुकानों पर उपलब्ध है। टोपी बाजार के पिचकारी विक्रेता मोहन सिंह का कहना है कि पिछले साल की तुलना में चाइनीज पिचकारियों की कीमत कुछ कम हुई है, जिससे इसकी डिमांड और वैरायटी इस बार बढ़ गई है।
केमिकल युक्त रंग हो सकते हैं घातक
अगर आपको अपने चेहरे से प्यार है तो होली खेलते समय जरा सावधान रहें। रसायन युक्त चमकीले और भड़कीले रंग आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रसायन युक्त ये कलर स्किन पर ऐसे धब्बे बना सकते हैं, जिनका आपकी त्वचा से हट पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा। रसायन युक्त रंगों के अधिक प्रयोग से चर्म रोग, एलर्जी, आंख में जलन, सूजन जैसी बीमारियों से भी दो चार होना पड़ सकता है।
चिकित्सकों का मानना है कि कोई भी रंग ऐसा नहीं जिसको शरीर के लिए पूरी तरह सुरक्षित कहा जा सके। रंग सूखे हों या गीले मैलसाइट ग्रीन, रोडामीन पेंट, आर्नामीन, मिथलीन ब्लू आदि रसायन से बनाए जाते हैं। ऐसे रंग त्वचा के लिए काफी घातक होते हैं। इन रंगों का असर भले ही तुरंत न दिखाई दे, लेकिन 10-15 दिन बाद बीमारी के रूप में ये रंग उभरते हैं।
गुलाल से खेलें होली
प्रदेश की शीर्ष व्यापारिक व औद्योगिक संस्था मप्र चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ग्वालियर के पदाधिकारियों ने अंचल के समस्त व्यवसायियों एवं उद्योगपतियों सहित आमजनता से अंचल में पानी की भयंकर समस्या को ध्यान में रखते हुए गुलाल और सूखे रंग से होली खेलने की मार्मिक अपील की है।
चेम्बर अध्यक्ष जीडी लड्ढा, संयुक्त अध्यक्ष हेमन्त गुप्ता, उपाध्यक्ष आरके खेतान, मानसेवी सचिव विजय गोयल, मानसेवी संयुक्त सचिव भूपेन्द्र जैन व कोषाध्यक्ष सुरेश बंसल ने अंचल में पानी की अत्यंत दयनीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बार होली के अवसर पर मात्र गुलाल एवं सूखे रंग का उपयोग करने की बात कही है। मानसेवी सचिव विजय गोयल ने बताया कि सोमवार को कलेक्टर के साथ हुई शांति समिति की बैठक में भी सर्वसम्मति से होली गुलाल और सूखे रंग से खेलने का निर्णय लिया गया है।
जरूरी डॉक्यूमैंट्स
होली खेलने से पहले शरीर पर तेल लगाएं
आयल पेंटों के रंगों का इस्तेमाल न करें
होली खेलते समय पानी और साबुन पास रखें
होली खेलने के बाद त्वचा को अच्छी तरह साफ करें
रंग भरकर गुब्बारे न फेंकें
श्वसन संबंधी रोगी सूखे रंगों से होली न खेलें